केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस्तीफा युवा शक्ति की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने युवाओं की जिद के आगे घुटने टेक दिए हैं। चीमा ने कहा कि उम्मीद है कि इससे शिक्षा प्रणाली का पुनर्गठन करने, पेपर लीक की समस्या को हल करने जैसे बड़े सुधार और विद्यार्थियों के लिए बड़े बदलाव होंगे।
आम आदमी पार्टी के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने भी इस इस्तीफे को करोड़ों विद्यार्थियों, युवाओं और लोकतंत्र की जीत करार दिया। उन्होंने जोर दिया कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। पेपर लीक खत्म करने और बड़े सुधारों पर काम करने की जरूरत है। कंग ने आंदोलन का नेतृत्व करने वाले विद्यार्थियों और युवाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने की हर कोशिश की। विद्यार्थियों की हिम्मत और एकता ने केंद्र को पीछे हटने पर मजबूर किया।
छात्रों का शांतिपूर्ण संघर्ष
विरोध कर रहे विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज हुआ और कई को अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रदर्शनकारियों के खाने-पीने के इंतजाम में भी रुकावट डालने की कोशिश की गई। इन सभी मुश्किलों के बावजूद विद्यार्थी एकजुट रहे। उन्होंने सरकार को कार्रवाई करने के लिए मजबूर होने तक अपना शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखा। कंग ने भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को तानाशाही रवैया अपनाने के खिलाफ चेतावनी दी। कंग ने कहा कि यदि सरकार विद्यार्थियों, किसानों और कर्मचारियों की आवाजें नजरअंदाज करती रही। तो लोग लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरेंगे।
जंतर मंतर पर शुरू हुआ संघर्ष अपने मुकाम पर पहुंचा : संधवां
पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने भी इस इस्तीफे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जंतर मंतर पर शुरू हुआ संघर्ष अपने मुकाम पर पहुंच गया है। संधवां ने इसे देश के विद्यार्थियों, नौजवानों और लोकतंत्र की जीत बताया।
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