नए शैक्षिक सत्र में स्कूलों की मनमानी के खिलाफ जिला प्रशासन ने एक बार फिर सख्ती दिखाई है। एनसीईआरटी और एससीईआरटी की तय किताबें न बेचने और निजी प्रकाशकों की किताबें ऊंचे दामों पर बेचने वाले सीबीएसई और सीआईएससीई से संबंद्ध 30 स्कूल जांच के दायरे में आ गए हैं। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने स्कूलों की जांच के लिए प्रशासनिक और शिक्षा अधिकारियों की छह संयुक्त टीमें बनाई हैं। ये टीमें एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौपेंगी।
प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ ऑल पेरेंट्स (पापा) के संस्थापक मनोज शर्मा ने जिलाधिकारी मनीष बंसल को लिखित शिकायत की थी। इसमें आरोप लगाया कि सीबीएसई, सीआईएससीई के अलावा बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें जबरन अभिभावकों को बेची हैं।
इससे अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। मनोज शर्मा की शिकायत पर डीएम ने अपर नगर मजिस्ट्रेट, डिप्टी कलेक्टर और खंड शिक्षा अधिकारियों की छह संयुक्त टीमें बनाईं हैं जो स्कूलों का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाएंगी। जांच के बाद दोषी मिलने पर स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शहर के सभी प्रमुख स्कूल जांच के दायरे में
मनोज शर्मा की शिकायत के बाद शहर और देहात क्षेत्र में संचालित लगभग सभी प्रमुख स्कूल जांच के दायरे में आ गए हैं। इनमें शहर के सीबीएसई, सीआईएससीई, यूपी बोर्ड और बेसिक शिक्षा परिषद के निजी स्कूल शामिल हैं।
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