महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यौन अपराधों में आरोपियों को पैरोल देने पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि 80-90% मामलों में आरोपी पहले भी ऐसे अपराध कर चुके होते हैं और पैरोल पर छूट मिलने के बाद दोबारा अपराध करते हैं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यौन अपराधों पर सख्ती बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। फडणवीस ने ऐसे आरोपियों को पैरोल (अस्थायी रिहाई) देने पर पूरी तरह रोक लगाने के उद्देश्य से नया कड़ा कानून तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान लिया गया, जहां मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जल्द से जल्द कानूनी मसौदा तैयार कर प्रस्ताव पेश करने को कहा।
बैठक में किन बातों पर चिंता जताई गई?
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने बैठक में चिंता जताई कि राज्य में यौन अपराधों के कई मामलों में आरोपी पहले भी इसी तरह के अपराधों में शामिल रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 80 से 90 प्रतिशत मामलों में आरोपी वे होते हैं जो पहले गिरफ्तार हो चुके होते हैं, लेकिन पैरोल पर बाहर आने के बाद दोबारा अपराध कर बैठते हैं। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए उन्होंने सख्त कानूनी प्रावधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
महाराष्ट्र ने इसी तरह कानून किया था लागू
फडणवीस ने यह भी उल्लेख किया कि उनके 2014 से 2019 के पिछले कार्यकाल के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने इसी तरह का एक कानून लागू किया था, जिसके तहत यौन अपराधों के आरोपियों को पैरोल देने पर रोक लगाई गई थी। हालांकि, यह कानून करीब तीन साल तक लागू रहने के बाद न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया था। इस बार सरकार ऐसे प्रावधान लाने की तैयारी कर रही है जो न्यायिक जांच में भी टिक सकें और कानूनी रूप से मजबूत हों।
यह कदम हाल ही में पुणे जिले के भोर तहसील में सामने आए एक बेहद दर्दनाक मामले के बाद उठाया गया है। इस मामले में 65 वर्षीय एक व्यक्ति पर चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या का आरोप है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पहले भी दो बार इसी तरह के अपराधों में शामिल रह चुका था और पैरोल के दौरान ही उसने यह जघन्य वारदात अंजाम दी। इस घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था और पैरोल प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को क्या दिए निर्देश?
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि प्रस्तावित कानून में ऐसे ठोस प्रावधान शामिल किए जाएं, जिससे यौन अपराधों के आरोपियों को किसी भी परिस्थिति में पैरोल का लाभ न मिल सके। साथ ही, कानून बनाते समय संवैधानिक प्रावधानों और न्यायालय के पिछले फैसलों को ध्यान में रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इसे कानूनी चुनौती का सामना न करना पड़े।
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