केंद्र सरकार कोयला से गैस बनाने की परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को जल्द मंजूरी दे सकती है। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
कोयला से गैस बनाने की परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल जल्द ही 37,500 करोड़ प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दे सकता है। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ होगी और आयात पर निर्भरता में कमी आएगी।
कोयला मंत्रालय ने इन परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना पर पहले ही एक कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है। इसका वित्तीय परिव्यय (खर्च) 37,500 करोड़ रुपये है। यह एक एकीकृत योजना है, जिसमें अलग से कोई श्रेणी नहीं है। एक एकल परियोजना के लिए अधिकतम वित्तीय सहायता 3,000 करोड़ रुपये है। सूत्रों के मुताबिक, कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए पिछली वित्तीय प्रोत्साहन योजना में सरकार ने तीन श्रेणियों के तहत सहायता दी थी। इसमें निजी क्षेत्र को प्रति परियोजना अधिकतम 1,000 करोड़ व सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों को 1,350 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया था।
आत्मनिर्भर बनेगा देश राष्ट्रीय लक्ष्य भी होगा पूरा
प्रस्तावित योजना का मकसद देशभर में सतह पर मौजूद कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं में तेजी लाना है। इसका लक्ष्य तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी), यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, अमोनिया, डीआरआई के जरिये से कोकिंग कोल, मिथेनॉल एवं डीएमई जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं पर आयात निर्भरता घटाकर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
योजना घरेलू कोयला एवं लिग्नाइट संसाधनों के इस्तेमाल बढ़ाएगी। साथ ही, 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद करेगी।
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