अमेरिका में 16 साल से गैर-कानूनी तौर पर रह रहे एक गुजराती कारोबारी पर डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने 1.8 मिलियन डॉलर (लगभग 15 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है। वह मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में दाखिल हुआ था।
इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट के प्रावधानों के तहत अप्रैल में जारी एक नोटिस में कहा गया है कि उसे कई साल पहले ही देश से निकाले जाने का आदेश दिया गया था, इसके बावजूद उसने जान-बूझकर अमेरिका छोड़ने से इनकार कर दिया। आदेश का पालन न करने की अवधि के दौरान यह जुर्माना 998 डॉलर (94,000 रुपये से ज्यादा) प्रति दिन के हिसाब से तय किया गया है।
2010 में हुआ था दाखिल
दस्तावेजों के मुताबिक, यह व्यक्ति 2010 में अमेरिका-मेक्सिको सीमा के रास्ते अमेरिका में दाखिल हुआ था और घुसने के कुछ ही समय बाद उसे हिरासत में ले लिया गया था। कुछ ही हफ्तों में उसे रिहा कर दिया गया था, लेकिन अगले ही साल उसे देश से निकाले जाने का अंतिम आदेश थमा दिया गया।
पत्नी और बच्चे को भी अमेरिका बुला लिया
हालांकि, उस समय के कई प्रवासियों की तरह कथित तौर पर वह उसके बाद इमिग्रेशन अधिकारियों के सामने पेश नहीं हुआ और अमेरिका में ही रहता रहा। इन सालों में उसने कई कारोबार शुरू किए और इसी तरह के रास्तों से अपनी पत्नी और दो बच्चों को भी ले आया।
दो साल पहले उसने U वीजा के लिए आवेदन किया, जो कुछ खास अपराधों के पीड़ितों को दिया जाता है और इसके तहत उसके पास एक वैध वर्क परमिट और सोशल सिक्योरिटी नंबर है।
क्या आरोप लगाया गया?
नोटिस में कहा गया है कि प्राप्तकर्ता न तो अमेरिकी नागरिक है और न ही उसे कानूनी तौर पर यहां रहने की अनुमति है। नोटिस में उस पर स्वेच्छा से देश छोड़कर न जाने, यात्रा दस्तावेजों के लिए आवेदन न करने और जरूरत पड़ने पर देश-निकाले के लिए खुद को पेश न करने का आरोप लगाया गया है।
उसे अपील करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। ऐसा न करने पर इस आदेश को अंतिम माना जाएगा और उसके बाद वसूली की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। यह स्पष्ट नहीं है कि जुर्माना भरने से उसके देश-निकाले पर क्या असर पड़ेगा।
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