अमेरिकी ट्रेड डील के बाद रूस से तेल खरीदी के मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने म्यूनिख सिक्योरिटी समिट में बोला कि ऊर्जा और विदेश नीति पर निर्णय स्वतंत्र रूप से लिए जाएंगे। उन्होंने जोर दिया कि खरीद संबंधी निर्णय व्यावसायिक होते हैं।
रूस से तेल खरीदी (Russian Oil) के मुद्दे पर अमेरिका ने भारत पर जुर्माने के तौर पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। हालांकि, ट्रेड डील के बाद इसे वापस ले लिया गया है। अब सवाल है कि क्या भारत, रूस से कच्चे तेल की खरीदारी जारी रखेगा? इस मुद्दे पर विदेशी मंत्री एस जयशंकर ने दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने कह कि भारत ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ के प्रति प्रतिबद्ध है और ऊर्जा व विदेश नीति पर स्वतंत्र निर्णय लेगा। विदेश मंत्री का यह बयान इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि नई दिल्ली ने एक नए ट्रेड फ्रेमवर्क के तहत अतिरिक्त रूसी तेल की खरीद को रोकने के लिए प्रतिबद्धता जताई है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह जवाब म्यूनिख सिक्योरिटी समिट में दिया है। दरअसल, अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद देश में सरकार को अमेरिका के सामने कथित तौर पर ‘आत्मसमर्पण’ करने के लिए देश में विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, वाशिंगटन ने सार्वजनिक रूप से इस समझौते को रूसी तेल आयात पर प्रतिबंधों से जोड़ा है।
विदेश मंत्री ने क्या कहा?
म्यूनिख सिक्योरिटी समिट में जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ बातचीत के दौरान सवालों का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति भारत का दृष्टिकोण गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “हम रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। यह हमारे इतिहास और विकास का एक अभिन्न अंग है… यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर राजनीति भी हो रही है।”
उन्होंने यह भी कहा कि खरीद संबंधी निर्णय आखिरकार व्यावसायिक होते हैं। एस जयशंकर ने कहा, “भारत में तेल कंपनियां, यूरोप की तरह ही… उपलब्धता, लागत और जोखिमों को देखती हैं और वे फैसले लेती हैं जो उन्हें अपने हित में लगते हैं।”
इससे पहले विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा था कि भारत की ऊर्जा खरीद, राष्ट्रीय हित पर निर्भर होती है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ने भारत से ‘अतिरिक्त रूसी तेल’ खरीदना बंद करने की ‘प्रतिबद्धता’ हासिल कर ली है, क्योंकि वाशिंगटन यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को पर प्रतिबंधों को कड़ा कर रहा है। रुबियो ने कहा, “भारत के साथ हमारी बातचीत में, हमें रूस से अतिरिक्त तेल खरीदना बंद करने की उनकी प्रतिबद्धता मिली है,” उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ने रूस के तेल क्षेत्र पर और प्रतिबंध लगाए हैं।
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