अनिल अग्रवाल की वेदांता ने उठाया बड़ा कदम, नायरा एनर्जी को कच्चा तेल देना किया बंद

वेदांता की केयर्न ऑयल एंड गैस ने रूस समर्थित नायरा एनर्जी को राजस्थान से कच्चे तेल की आपूर्ति रोक दी है। यूरोपीय संघ और ब्रिटेन द्वारा नायरा पर प्रतिबंधों के कारण वेदांता ने संभावित अनुपालन समस्याओं से बचने के लिए यह कदम उठाया। यह आपूर्ति नायरा की कुल जरूरत का 5-10% थी। अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं और शिपिंग समस्याओं के बाद यह नायरा के लिए एक और झटका है, जिससे उसकी निर्यात आय भी प्रभावित हुई है।

रूस के अलावा दुनिया के अन्य देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति बंद होने के बाद रोसनेफ्ट के समर्थन वाली वाली भारतीय रिफाइनरी कंपनी नायरा एनर्जी को घरेलू बाजार में भी कच्चा तेल मिलना बंद हो गया है। अब इसका असर सोमवार को शेयर बाजार खुलने पर कंपनी के शेयरों पर भी देखने को मिल सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, वेदांता लिमिटेड की केयर्न ऑयल एंड गैस ने पाबंदियों के इस माहौल के बीच नायरा को राजस्थान के अपने तेल क्षेत्र से से कच्चे तेल की आपूर्ति रोक दी है। नायरा में रोसनेफ्ट समेत कई रूसी कंपनियों का स्वामित्व है।

राजस्थान से आने वाला कच्चा तेल उसकी कुल जरूरत का लगभग पांच-10 प्रतिशत था। इस आपूर्ति को गुजरात में उसकी दो करोड़ टन सालाना (लगभग 4,00,000 बैरल प्रतिदिन) क्षमता वाली वाडिनार रिफाइनरी में पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में बदला जाता था।

पिछले साल यूरोपीय संघ और ब्रिटेन द्वारा कंपनी पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद वेदांता लिमिटेड की लंदन स्थित मूल कंपनी वेदांता रिसोर्सेज एक प्रतिबंध के दायरे में आने वाली कंपनी के साथ वाणिज्यिक करार के कारण दूसरे पाबंदियों के खतरे को लेकर सावधान हो गई थी। इस मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि अनुपालन की संभावित दिक्कतों से बचने के लिए वेदांता की केयर्न ऑयल एंड गैस ने नायरा को कच्चे तेल की आपूर्ति रोक दी। केयर्न ऑयल एंड गैस राजस्थान के बाड़मेर तेल क्षेत्र का परिचालन करती है। हालांकि, इस बारे में नायरा को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।

केयर्न के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम विशेष ग्राहक अनुबंध या वाणिज्यिक व्यवस्था पर टिप्पणी नहीं करते हैं।”

प्रवक्ता ने कहा, ठकेयर्न ऑयल एंड गैस अपने कच्चे तेल और गैस को पहले से स्थापित व्यवस्था के तहत विपणन करती है, जिससे भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।”

जुलाई 2025 में, यूरोपीय संघ ने यूक्रेन विवाद के बीच रूस के तेल राजस्व को रोकने के बड़े कदम के तहत नायरा एनर्जी पर प्रतिबंध लगा दिया था। इन उपायों में रूसी कच्चे तेल से बने पेट्रोलियम उत्पादों पर यूरोपीय संघ के बाजारों में प्रतिबंध लग गया था। साथ ही प्रतिबंध के दायरे में आने वाली इकाइयों के लिए वित्तीय और समुद्री मार्ग के जरिये सेवाओं पर पहुंच सीमित की गई थी।

इसके तुरंत बाद ब्रिटेन ने रूस के तेल हितों पर निशाना साधते हुए ऐसे ही प्रतिबंधों की घोषणा की, जिसमें नायरा जैसी इकाइयां शामिल थीं, क्योंकि रूस की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी रोसनेफ्ट के पास इसका बहुलांश स्वामित्व है।

इन पाबंदियों ने न सिर्फ नायरा को यूरोपियन ईंधन बाजार से बाहर कर दिया, बल्कि उसके लिए कच्चे तेल की खरीद के विकल्पों को भी सीमित कर दिया। सऊदी अरब और इराक के तेल उत्पादक, जिनकी यूरोप में काफी वाणिज्यिक पहुंच है, ने यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के कदमों के बाद कंपनी को आपूर्ति रोक दी।

जहाज के जरिये आपूर्ति में दिक्कतों ने नायरा की परेशानियों को और बढ़ा दिया। कई टैंकर परिचालक जो बीमा कवर के लिए लंदन के पीएंडआई क्लब और अन्य अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों पर निर्भर थे, उन्होंने वाडिनार को आपूर्ति भेजने या उठाने से इनकार कर दिया। सूत्रों का कहना है कि इसके सामूहिक प्रभाव से रोसनेफ्ट समर्थित रिफाइनरी कंपनी के लिए जहां कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, वहीं उसकी निर्यात आमदनी पर भी असर पड़ा है।

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