इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सीतापुर में समाजवादी पार्टी के कार्यालय को खाली कराने सम्बंधी नगर पालिका परिषद की नोटिस को चुनौती देने वाली सपा की याचिका निस्तारित कर दी। बृहस्पतिवार को सुनवाई के समय सीतापुर नगर पालिका परिषद के वकीलों ने नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी का 22 जनवरी का आदेश/ नोटिस, कोर्ट के समक्ष पेश किया।
इसमें कहा गया था कि याचिका में चुनौती दिए गए 7 जनवरी के आदेश/ नोटिस को यह कहकर वापस ले लिया गया है कि समुचित नियमों के तहत करवाई की जाएगी। इसपर, कोर्ट ने कहा कि मामले में कोई नई कारवाई होने पर, याची को इसे चुनौती देने की छूट होगी। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश समाजवादी पार्टी की याचिका पर दिया। याची की ओर से दलील दी गई थी कि नोटिस के अनुसार टाउन हॉल प्रांगण में जिस जमीन पर सपा कार्यालय बना हुआ है, वह नजूल की भूमि है।
15 जनवरी 2005 को इस भूमि को पार्टी कार्यालय के लिए आवंटित किया गया था, हालांकि, आवंटन के चार महीने बाद ही 14 मई 2005 को इसका आवंटन निरस्त भी कर दिया गया था। दलील दी गई कि नोटिस तथ्यात्मक तौर पर पूरी तरह से गलत है, क्योंकि वर्ष 2005 में नगर पालिका अध्यक्ष की ओर से 90 साल के पट्टे पर यह जमीन पार्टी कार्यालय बनाने के लिए दी गई थी।
सपा कार्यालय 90 साल के लीज डीड के आधार पर बना है न कि 15 जनवरी 2005 के आवंटन के आधार पर। यह भी कहा गया था कि यदि 90 साल की लीज डीड निरस्त करनी है तो याची पक्ष को उसकी नोटिस तामील करायी जानी चाहिए। वहीं, नगर पालिका की ओर से पेश वकील का कहना था कि उन्हें याची पक्ष की ओर से किए गए इस दावे के संबंध में निर्देश( जानकारी) प्राप्त करने के लिए समय चाहिए। इस पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी को निर्धारित की थी।
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