भारत और चीन के बीच मई की शुरुआत से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गतिरोध जारी है। दोनों पक्षों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन इसका कोई खास असर नहीं दिखा है क्योंकि भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में अब भी आक्रामक पोजीशन पर तैनात हैं। इसी बीच केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि एलएसी पर गतिरोध को हल करने के लिए चीन के साथ कूटनीतिक और सैन्य स्तर की वार्ता से कोई ‘सार्थक समाधान’ नहीं निकला है। उन्होंने कहा कि अब भी यथास्थिति बनी हुई है।

समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर यथास्थिति बनी रहती है, तो सैनिकों की तैनाती में कमी नहीं हो सकती। उन्होंने भारत-चीन सीमा मामलों (डब्ल्यूएमसीसी) पर परामर्श और समन्वय कार्यतंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की कार्य प्रणाली का उल्लेख किया, जिसकी बैठक इस महीने की शुरुआत में हुई थी। साथ ही कहा कि अगले दौर की सैन्य वार्ता कभी भी हो सकती है।
राजनाथ ने कहा, ‘यह सच है कि भारत और चीन के बीच गतिरोध को कम करने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत हो रही हैं। लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। सैन्य स्तर पर अगले दौर की वार्ता कभी भी हो सकती है। लेकिन कोई सार्थक परिणाम नहीं आया है और यथास्थिति है। अगर यथास्थिति बनी रहती है, तो यह स्वाभाविक है कि तैनाती को कम नहीं किया जा सकता है। हमारी तैनाती में कोई कमी नहीं होगी और मुझे लगता है कि उनकी तैनाती में भी कमी नहीं आएगी। मुझे नहीं लगता कि यथास्थिति एक सकारात्मक नतीजा है। वार्ता जारी है और वे एक सकारात्मक परिणाम दें, यही हमारी अपेक्षा है।’
सिंह कहा कि हॉटलाइन संदेशों का आदान-प्रदान किया गया है। उन्होंने ने कहा, ‘किन मुद्दों पर बातचीत होगी, इसके लिए दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है।’ बता दें कि डब्ल्यूएमसीसी की 18 दिसंबर को हुई बैठक के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा था कि दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य स्तर पर करीबी परामर्श बनाए रखने पर सहमत हुए हैं।
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