पश्चिम एशिया (West Asia Crisis) में जारी सैन्य संघर्ष और उससे उपजे ऊर्जा संकट का असर भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) पर देखने को मिल रहा है। दरअसल, भारत का व्यापार घाटा (Indias Trade Deficit) अप्रैल में बढ़कर 28.38 अरब डॉलर (2 लाख 72 हजार करोड़ से ज्यादा) हो गया, जबकि मार्च में यह 20.67 अरब डॉलर था। आयात और निर्यात दोनों में वृद्धि के कारण यह वृद्धि हुई।
आयात 71.94 अरब डॉलर रहा, जो पिछले महीने के 59.59 अरब डॉलर से अधिक है। वहीं, अप्रैल में माल निर्यात 43.56 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले महीने यह 38.92 अरब डॉलर था। हालांकि, वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल में माल निर्यात में वार्षिक आधार पर 13 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक मासिक वृद्धि में से एक है।
आयात-निर्यात के आंकड़े
अप्रैल में माल निर्यात 43.56 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले महीने यह 38.92 अरब डॉलर था। वहीं, आयात 71.94 अरब डॉलर रहा, जो पिछले महीने के 59.59 अरब डॉलर से अधिक है।
हालांकि, वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल में सालाना आधार पर माल निर्यात में 13 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक मासिक वृद्धि में से एक है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम और पोल्ट्री निर्यात के प्रमुख चालक रहे हैं, जबकि पश्चिम एशिया को होने वाले निर्यात में अप्रैल में पिछले वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। अग्रवाल ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया से आयात में भी उल्लेखनीय कमी आई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में अप्रैल में 30 प्रतिशत कम हो गया है।
क्या होता है व्यापार घाटा?
व्यापार घाटा तब होता है जब कोई देश विदेशों से जो सामान खरीदता है (आयात/Imports), उसकी कीमत विदेशों में बेचे गए सामान (निर्यात/Exports) से ज्यादा होती है।
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