हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं में समय से पहले आ सकता है मेनोपॉज

महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा सिर्फ एक शारीरिक या मानसिक आघात नहीं है, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य को जीवन भर के लिए गहराई से प्रभावित करती है।

एक नई रिसर्च में एक बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है। अध्ययन के अनुसार, जो महिलाएं अपने जीवन में हिंसा का सामना करती हैं, उन पर इसका असर अधेड़ उम्र तक बना रहता है। सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसी महिलाओं में मेनोपॉज का समय जल्दी आ सकता है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस रिसर्च में और क्या-क्या बातें निकलकर सामने आई हैं।

डेढ़ साल पहले आ सकता है मेनोपॉज

यह अहम शोध ‘मैचुरिटास’ नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। स्पेन के ग्रेनाडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि जीवन भर किसी भी प्रकार की हिंसा का शिकार होने वाली महिलाओं को सामान्य महिलाओं की तुलना में लगभग डेढ़ साल पहले मेनोपॉज हो सकता है।

आंकड़ों के अनुसार, ऐसी महिलाएं बिना हिंसा वाले इतिहास की महिलाओं के मुकाबले 20 महीने पहले ही मेनोपॉज के चरण में पहुंच सकती हैं। इस वजह से उनमें ‘प्रीमेच्योर ओवेरियन फेल्योर’ यानी समय से पहले ओवरी के काम बंद कर देने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

लक्षण होते हैं ज्यादा गंभीर और तकलीफदेह
वैज्ञानिक साक्ष्य लगातार इस बात की ओर इशारा करते हैं कि हिंसा सहने वाली महिलाओं में मेनोपॉज के लक्षण कहीं अधिक गंभीर और स्पष्ट होते हैं। इन लक्षणों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

हॉट फ्लैशेस: अचानक से बहुत तेज और बार-बार गर्मी के झोंके महसूस होना।
पसीना आना: रात के समय सोते हुए अत्यधिक पसीना आना।
मानसिक समस्याएं: एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद न आना।
अन्य परेशानियां: सेक्स से जुड़ी या यूरोजेनिटल समस्याएं।

दशकों तक रहता है हिंसा का असर
इन गंभीर और लगातार बने रहने वाले लक्षणों के कारण, मेनोपॉज के बाद महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता काफी खराब हो जाती है। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा केवल एक सामाजिक बुराई नहीं है, बल्कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा है। हिंसा के हमले का दर्द भले ही समय के साथ कम हो जाए, लेकिन स्वास्थ्य पर इसके गंभीर प्रभाव दशकों बाद भी शरीर में बने रहते हैं।

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