हरियाली तीज के आने का सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं बेसब्री से इंतजार करती हैं। हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत करने का अधिक महत्व है।
हरियाली तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि व्रत का पारण न करने से पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। कई लोग इस बात को शायद नहीं जानते होंगे कि व्रत खोलने का क्या है सही तरीका और सबसे पहले क्या खाना चाहिए? आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।
व्रत खोलते समय सबसे पहले क्या खाएं या पिएं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरियाली तीज व्रत का पारण सबसे पहले गंगाजल पीकर करना बहुत शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा में चढ़ाई गई मिठाई का सेवन करें, क्योंकि हिंदू धर्म में कोई भी व्रत मीठा खाकर खोलना शुभ माना जाता है। ऐसे में आप हलवा, खीर या किसी मिठाई से भी व्रत खोल सकती हैं।
कैसे करें व्रत का पारण?
हरियाली तीज का व्रत पारण अगले दिन सुबह किया जाता है।
इस दिन सुबह जल्दी उठने के बाद स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
मंदिर की सफाई करने के बाद गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें।
भगवान शिव और मां पार्वती की देसी घी का दीपक जलाकर पूजा-अर्चना करें।
उन्हें फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
सात्विक भोजन और मिठाई का भोग लगाएं।
भगवान से व्रत के समय हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और सुहाग की लंबी आयु के लिए कामना करें।
इसके बाद व्रत का पारण करें।
इन बातों का रखें ध्यान
सावन का महीना हरियाली का प्रतीक है। इसलिए हरियाली तीज के दिन हरे रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
इस अवसर पर हरे रंग की साड़ी या सूट, हरी चूड़ियां पहननी चाहिए।
सुहागिन महिलाएं सोलह शृंगार करें और इसके बाद शिव जी के संग मां पार्वती की पूजा-अर्चना करें।
मां पार्वती को सोलह शृंगार की चीजें अर्पित करना शुभ माना जाता है।
महादेव को बेलपत्र, भांग, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करना चाहिए।
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ पूजा की जाती है।
हरियाली तीज के दिन मिट्टी के शिव-पार्वती की पूजा-अर्चन की जाती है।
मंदिर या गरीब लोगों में विशेष चीजों का दान जरूर करना चाहिए।
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