सबूतों के अभाव में अदालत ने आरोपी को बरी किया, चार साल पहले पत्नी की हत्या का लगा था आरोप

महाराष्ट्र के ठाणे में अदालत ने पत्नी की हत्या के आरोपी सक्ष्यों की कमी के कारण बरी कर दिया है। आरोप था कि शख्स ने चार साल पहले अपनी पत्नी की हत्या किया था।

ठाणे की एक अदालत ने 2021 में अपनी पत्नी की हत्या के आरोपी 32 वर्षीय व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष साक्ष्यों पर आधारित इस मामले में दोष सिद्ध करने के लिए आवश्यक बुनियादी तथ्यों को साबित करने में असफल रहा। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस.बी. अग्रवाल ने शनिवार को अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष का यह दायित्व है कि वह परिस्थितियों की कड़ी में शामिल प्रत्येक तथ्य को साबित करे। जो केवल इस परिकल्पना की ओर ले जाता है कि आरोपी दोषी है और उसकी निर्दोषता की कोई संभावना नहीं है।

पत्नी का सिर बाथरूम के फर्श पर पटकने का आरोप
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि 9 मई, 2021 को शान मोहम्मद शाबिद अली खान ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले के दाइघर स्थित अपने आवास पर अपनी चौथी पत्नी अरफा खान की हत्या कर दी थी। आरोप है कि खान को शक था कि उसकी पत्नी का किसी और के साथ संबंध है। उसने पत्नी का सिर बाथरूम के फर्श पर पटक दिया, जिससे उसे जानलेवा चोटें आईं और चेहरे की हड्डियां टूट गईं। कुछ पड़ोसियों ने अरफा को खून से लथपथ पाया, और उसका दो साल का बच्चा उसके शव पर रो रहा था।

हत्या के तहत मामला दर्ज था
खान पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत आरोप लगाया गया था और वह 9 जून, 2021 से जेल में है। हालांकि पीड़ित की मेडिकल रिपोर्ट ने हत्या की पुष्टि की, लेकिन अदालत ने आरोपी को इस कृत्य से जोड़ने वाले सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, “भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के तहत साक्ष्य प्रस्तुत न करने के आधार पर ही आरोपी के विरुद्ध दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। मूलभूत तथ्यों को प्रस्तुत करना अभियोजन पक्ष का दायित्व है और अभियोजन पक्ष को ही अपने दम पर खड़ा होना होगा।”

रोलिंग बोर्ड पर खून के धब्बे नहीं पाए जाने पर उठाए सवाल
अदालत ने गौर किया कि घटना वाले दिन पूरी तरह से मौके पर पंचनामा करने के बावजूद, हमले में कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया रोलिंग बोर्ड बाद में ही बरामद किया गया था। इसमें कहा गया है, “जहां तक रोलिंग बोर्ड का सवाल है, यह ध्यान देने योग्य है कि घटना वाले दिन ही घटनास्थल पर पंचनामा तैयार किया गया था और लगभग एक घंटे तक चला था। इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया जा रहा है कि उस दिन रोलिंग बोर्ड पर खून के धब्बे क्यों नहीं पाए गए। अदालत ने यह भी पाया कि प्रमुख गवाहों ने हत्या के समय आरोपी को घटनास्थल पर मौजूद नहीं बताया। यह निष्कर्ष निकालते हुए कि अभियोजन पक्ष आरोपी के अपराध को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, अदालत ने उसे बरी कर दिया और उसे तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com