शादीशुदा युवतियां यहां रहती हैं विधवाअों की तरह

पंजाब की 30 हजार से अधिक युवतियां की अजीब मजबूरी है। वे शादीशुदा होकर भी विधवाआें की जिंदगी जीने को विवश हैं। विदेश में जीवन गुजारने की ख्‍वाहिश उन पर भारी पड़ रही है। विेदेश ले जाने का झांसा देनेकर एनआरआइ युवक उनसे शादी तो रचा लेते हैं, ले‍किन चंद दिन साथ गुजारने के बाद वे वापस चले जाते हैं और फिर ये दुल्‍हनें उनका इंतजार करती रह जाती हैं।

अत्‍याचार के खिलाफ उठने लगी आवाज, एनआरआइ दूल्‍हों की श्किार युवतियां बोली ‘अब नहीं’ सहेंगे

उम्‍मीद का दामन पकड़े-पकड़े वे विधावाओं सी जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। लेकिन, अब उन्‍होंने ऐसे दूल्हों को मजा चखाने की ठान ली है। ऐसे दूल्हों के पासपोर्ट रद करवाने और इन्हें भारतीय कानून के मुताबिक सजा दिलवाने के लिए रोजाना दर्जनों महिलाएं पासपोर्ट कार्यालय में पहुंच रही हैं। उन्‍होंने ‘अब नहीं’ नाम से एसोसिएशन बनाया है और संघर्ष करने का फैसला किया है।

एफआइआर दर्ज करवाए जाने पर हो सकता है एनआरआइ दूल्हों का पासपोर्ट इंपाउंड

जगराओं निवासी सीमा ने बताया कि करीब छह साल पहले मूल रूप से जगराओं के ही रहने वाली लखबीर सिंह ने उसे अपने साथ विदेश ले जाने का लालच देकर शादी की। शादी के बाद वह उसे मायके छोड़ यह कह कर विदेश चला गया कि जल्द ही उसके दस्तावेज बनवा कर अपने साथ ले जाएगा। इस दौरान उसने एक बेटी को जन्म दिया और आज पांच सालों से वह अपने पति का इंतजार कर रही है।  पति के खिलाफ  केस दर्ज करवाया। अदालत ने पति को पीओ करार दिया और एलओसी भी जारी हुआ लेकिन अभी तक उसके पति का न तो पासपोर्ट ही रद किया गया और न ही उसे भारत डिपोर्ट किया गया।
आठ लाख मांग रहा था पति

लुधियाना के समराला चौक क्षेत्र निवासी पलविंदर कौर ने बताया कि बहरीन में रहने वाला शिंदर सिंह साल 2016 में लुधियाना आया और विदेश ले जाने की बात कहते हुए उससे शादी की। उसने बताया कि साल 2017 में वह उसकी छोटी बहन की शादी में आया और अपने साथ ले जाने के लिए लाख रुपये की मांग रखी। लेकिन, उसके परिजन पैसा देने के हालात में नहीं थे तो वह वापस लौट गया और तलाक देने संबंधी उस पर दबाव डालने लगा। एनआरआइ थाना में शिंदर सिंह के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया, लेकिन अभी तक न तो उसके पति का पासपोर्ट ही रद किया गया और हीं उसे गिरफ्तार कर भारत लाया गया है।

पीडि़ताओं ने बनाया एसोसिएशन

एनअारआइ दूल्हों से पीडि़त महिलाओं ने एकजुट होकर ‘अब नहीं’ नामक एसोसिएशन का गठन किया है। इसके माध्‍यम से वे एनआरआइ दूल्हों की करतूतों को उजागर करेंगी। एसोसिएशन की प्रधान सतविंदर कहती हैं कि पासपोर्ट अधिकारियों की तरफ से उन्हें सहयोग नहीं दिया जा रहा। इसलिए अब उन्होंने इस तरह के मामलों को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के समक्ष उठाने का फैसला किया है।

अमृतसर के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी राजकुमार बाली ने कहा कि इस तरह के मामलों में एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपित एनआरआइ दूल्हे का पासपोर्ट इंपाउंड किया जा सकता है। इसके लिए प्रभावित महिला को अपना मैरिज सर्टिफिकेट दिखाना होगा व अन्य सभी औपचारिकताएं पूरी होनी चाहिए।

उन्‍होंने कहा कि इसके बाद विदेश में रहने वाले भारतीय दूल्हे के खिलाफ विभिन्‍न देशों के सभी दूतावासों में एक सर्कुलर जारी कर दिया जाता है। वहां आरोपित व्‍यक्ति के कागजात कब्जे में लेकर उसे भारत में पहुंचने के लिए इमरजेंसी ट्रेवल सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। केस क्लीयर होने के बाद ही इस तरह के आरोपित को दोबारा पासपोर्ट जारी किया जाता है।

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