राष्ट्रपति ने 11 शास्त्रीय भाषाओं में पुस्तकों, पांडुलिपियों के लिए ‘ग्रंथ कुटीर’ का किया शुभारंभ

राष्ट्रपति भवन ने कहा गया है कि संग्रह में तमिल, संस्कृत, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओडिया, मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषा की रचनाएं शामिल हैं, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, दार्शनिक, साहित्यिक और बौद्धिक विरासत को दर्शाती हैं। ‘ग्रंथ कुटीर’ में महाकाव्य, दर्शन, भाषा विज्ञान, इतिहास, शासन, विज्ञान और भक्ति साहित्य जैसे विषयों पर पांडुलिपियां और पुस्तकें हैं, साथ ही शास्त्रीय भाषाओं में भारत का संविधान भी है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन द्वारा औपनिवेशिक विरासत से छुटकारा पाने और भारत की 11 शास्त्रीय भाषाओं में लगभग 2,300 पुस्तकों और पांडुलिपियों के लिए एक समर्पित स्थान बनाने के उपाय के तहत एक ‘ग्रंथ कुटीर’ का उद्घाटन किया।

राष्ट्रपति भवन के एक बयान में कहा गया है कि संग्रह में तमिल, संस्कृत, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओडिया, मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषा की रचनाएं शामिल हैं, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, दार्शनिक, साहित्यिक और बौद्धिक विरासत को दर्शाती हैं।

‘ग्रंथ कुटीर’ (शास्त्र पुस्तकालय) में महाकाव्य, दर्शन, भाषा विज्ञान, इतिहास, शासन, विज्ञान और भक्ति साहित्य जैसे विषयों पर पांडुलिपियां और पुस्तकें हैं, साथ ही शास्त्रीय भाषाओं में भारत का संविधान भी है।

संग्रह में लगभग 50 पांडुलिपियां भी शामिल हैं, जिनमें से कई ताड़ के पत्ते, कागज, छाल और कपड़े जैसी पारंपरिक सामग्रियों पर हस्तलिखित हैं।हाल तक यहां विलियम होगार्थ की मूल कृतियों की सूची, लॉर्ड कर्जन ऑफ केडलस्टन के भाषण, लॉर्ड कर्जन ऑफ केडलस्टन के प्रशासन का सारांश, लॉर्ड कर्जन का जीवन, पंच पत्रिकाएं और अन्य पुस्तकें रखी जाती थीं।

अब इन्हें राष्ट्रपति भवन के भीतर एक अलग स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है और अभिलेखीय संग्रह का हिस्सा होने के नाते इन पुस्तकों का डिजिटलीकरण कर दिया गया है और शोधकर्ताओं के लिए इन्हें आनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा।

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