संसद का मानसून सत्र आज से शुरू होने वाला है। सत्र की शुरुआत से पहले NGO कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव की एक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में अप्रैल में खत्म हुए बजट सत्र की हाजिरी के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक कम सांसदों वाली छोटी पार्टियों के सांसदों की औसत हाजिरी सबसे ज्यादा रही।
लोकसभा के आंकड़ों के अनुसार, बजट सत्र की कुल 31 बैठकों में से सभी बैठकों में सिर्फ 101 सांसद शामिल हुए। यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड वाले 483 सांसदों का करीब 21 प्रतिशत है। यानी आधे से भी कम सांसदों यानी 45.7 प्रतिशत ने 90 से 100 प्रतिशत बैठकों में भाग लिया या हाजिरी रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए।
अगर पार्टियों के हिसाब से देखें तो एक सांसद वाली RLP और दो सांसदों वाली RLD ने 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की है। वहीं CPI(ML-L) और जोरम पीपुल्स मूवमेंट भी 30 और 31 बैठकों में शामिल होकर दूसरे स्थान पर रहे। समाजवादी पार्टी के 37 सांसदों की औसत उपस्थिति 28.4 दिन रही और वह तीसरे स्थान पर रही।
वहीं सबसे बड़ी पार्टियों की उपस्थिति उपेक्षा से कम रही। बीजेपी के 191 सांसदों की औसत उपस्थिति 26.5 बैठकें रही। कांग्रेस के 97 सांसद औसतन 23.1 बैठकों में ही शामिल हुए। क्षेत्रीय दलों में TMC की औसत उपस्थिति 15 बैठकें और DMK की 14.6 बैठकों में रही।
राज्यसभा में भी स्थिति कुछ ऐसी ही रही। कुल 255 सांसदों में से 119 यानी 46.6 प्रतिशत से कम सांसदों ने 90 से 100 प्रतिशत बैठकों में भाग लिया। यहां भी सबसे अच्छी उपस्थिति क्षेत्रीय दलों की रही। DMDK के अकेले सांसद ने 100 प्रतिशत हाजिरी दी।
वहीं J&K-NC के तीन सांसदों की औसत उपस्थिति 94.6 प्रतिशत रही। JDS, MNF, BJD, SP और NPP के सांसदों की उपस्थिति भी 90 प्रतिशत से ज्यादा रही। इसके बावजूद सदन में सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी की औसत उपस्थिति 84.4 प्रतिशत और कांग्रेस की 80.6 प्रतिशत रही।
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