दुनिया से विदा हुआ सबसे पहले एक ओवर में 6 छक्के मारने वाला बल्लेबाज

क्रिकेट इतिहास के सबसे महान आलराउंडरों में से एक सर गैरी सोबर्स का शुक्रवार को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने शुक्रवार को उनके निधन की पुष्टि की, हालांकि मौत के कारण का खुलासा नहीं किया गया। ये वही खिलाड़ी है जिसने दुनिया को पहली बार बताया था कि एक ओवर में छह छक्के मारे जा सकते हैं।

सोबर्स ने ही उस समय विश्व क्रिकेट को हिला दिया था जब उन्होंने एक ओवर में छह गेंदों पर लगातार छह छक्के मारे थे। इसके बाद कई लोगों ने किया जिसमें भारत के रवि शास्त्री और युवराज सिंह के नाम भी शामिल हैं।

बना दी थी नई रिकॉर्डबुक

1965 में सोबर्स वेस्टइंडीज के कप्तान बने। 1968 में नाटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए उन्होंने ग्लैमरगन के मैल्कम नैश के एक ओवर में लगातार छह छक्के लगाकर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यह कारनामा करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने। सोबर्स बाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज होने के साथ-साथ तेज और स्पिन दोनों तरह की गेंदबाजी में माहिर थे तथा मैदान के किसी भी हिस्से में बेहतरीन क्षेत्ररक्षण करते थे।

अपनी बेजोड़ बल्लेबाजी, हर तरह की गेंदबाजी और शानदार क्षेत्ररक्षण के दम पर सोबर्स ने क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। विजडन अल्मनैक ने उन्हें 20वीं सदी के पांच महानतम क्रिकेटरों में शामिल किया था, जबकि महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने उन्हें अपने समय का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर बताया था।

दोनों हाथों में थी अतिरिक्त अंगुली

28 जुलाई 1936 को बारबाडोस के सेंट माइकल में जन्मे गैरी सोबर्स का पूरा नाम गारफील्ड सेंट आबर्न सोबर्स था। उनका जन्म दोनों हाथों में एक-एक अतिरिक्त अंगुली के साथ हुआ था। बचपन में उन्होंने खुद ही तेज चाकू और कैटगट (सर्जिकल टांका) की मदद से इन अतिरिक्त अंगुलियों को हटा दिया। सोबर्स का बचपन संघर्षों से भरा रहा। जब वह केवल पांच वर्ष के थे, तब कनाडाई मर्चेंट नेवी में नाविक उनके पिता द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन हमले में मारे गए। उनकी मां थेल्मा ने अकेले ही छह बच्चों का पालन-पोषण किया।

सोबर्स ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि उनकी मां ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद बच्चों की पढ़ाई, भोजन और पालन-पोषण में कभी कमी नहीं आने दी। फुटबॉल और बास्केटबॉल में भी प्रतिभाशाली सोबर्स का पहला प्यार क्रिकेट था। बचपन में वह सड़क और समुद्र तट पर ‘लिलिपुटियन क्रिकेट’ खेलते थे, जिसमें तार की गेंद और लकड़ी के टुकड़े से बने बल्ले का इस्तेमाल होता था।

16 वर्ष की उम्र में उन्होंने बारबाडोस के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया और 1954 में वेस्टइंडीज के लिए पहला टेस्ट खेला। 21 वर्ष की आयु में पाकिस्तान के विरुद्ध अविजित 365 रन बनाकर उन्होंने उस समय टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बनाया। वह आज भी टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज हैं।

महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने दी थी नाइटहुड की उपाधि

1975 में क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान के लिए महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें ‘नाइटहुड’ की उपाधि से सम्मानित किया। 1998 में उन्हें बारबाडोस के 10 आधिकारिक राष्ट्रीय नायकों में शामिल किया गया और उनके सम्मान में सर गारफील्ड सोबर्स स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का निर्माण किया गया। महान दक्षिण अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेला भी उन्हें अपने पसंदीदा क्रिकेटरों में गिनते थे।

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