भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी वीजा अपॉइंटमेंट में देरी

अमेरिका में फॉल एकेडमिक सीजन शुरू होने में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं, ऐसे में भारतीय छात्रों सहित अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए समय पर छात्र-वीजा अपॉइंटमेंट न मिलना एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

इस मुद्दे पर अब 30 अमेरिकी सीनेटरों ने विदेश विभाग पर दबाव बनाते हुए F, M और J वीजा के प्रोसेसिंग में हो रही देरी का स्पष्टीकरण मांगा है। आपको बता दें कि ये वीजा शैक्षणिक अध्ययन, वोकेशनल पाठ्यक्रमों और एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए दिए जाते हैं।

वीजा अपॉइंटमेंट की कमी पर विदेश मंत्री से सवाल

11 अगस्त को लिखे गए पत्र में सीनेटर एलेक्स पाडिला और 29 अन्य सीनेटरों ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को बताया कि उन्हें छात्रों और अन्य हितधारकों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कई अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में समय पर वीजा अपॉइंटमेंट उपलब्ध नहीं हैं।

सीनेटरों ने कहा कि इस देरी के कारण छात्र और एक्सचेंज विजिटर शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत तक समय पर अमेरिका पहुंचने से वंचित रह सकते हैं।

उन्होंने विदेश विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इंटरव्यू के लिए अपॉइंटमेंट कैसे आवंटित किए जा रहे हैं, विभाग की प्राथमिकताओं में छात्र और एक्सचेंज वीजा का क्या स्थान है, और क्या F, M और J आवेदकों की प्राथमिकता कम कर दी गई है।

क्या है सीनेटरों की प्रमुख मांगें?

पत्र में कहा गया है कि हम विदेश विभाग से आग्रह करते हैं कि जांचे-परखे लौट रहे छात्र आवेदकों के लिए इंटरव्यू में दी जाने वाली छूट को बढ़ाया जाए, समय पर वीजा की जांच और प्रोसेसिंग के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और अधिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए हितधारकों के साथ सार्थक रूप से बातचीत की जाए।

इस पत्र में कर्मचारियों की संख्या, सबसे अधिक छात्र और एक्सचेंज-विजिटर वीजा प्रोसेस करने वाले पांच प्रमुख केंद्रों पर वीजा-प्रोसेसिंग के औसत समय, और गहन जांच के बाद खारिज किए गए आवेदनों की संख्या का डेटा भी मांगा गया है।

देरी के कारण भारतीय छात्रों पर पड़ेगा प्रभाव

सीनेटरों का यह दखल ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब कई भारतीय छात्र फॉल 2026 इंटेक के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों में जाने की तैयारी कर रहे हैं।

हालांकि, ओपन डोर्स का डेटा नए छात्रों के नामांकन का देश-वार विश्लेषण नहीं देता है, लेकिन अमेरिका जाने वाले छात्रों में ऐतिहासिक रूप से भारतीयों की संख्या काफी बड़ी रही है।

आंकड़ों के मुताबिक, शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के दौरान अमेरिका में भारत के लगभग 3.6 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे थे।

इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि कर्मचारियों की भारी कमी और सख्त इंटरव्यू प्रक्रियाओं के कारण वीजा मिलने में अभूतपूर्व देरी हो रही है, जिसमें आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच भी शामिल है।

भारतीय F-1 वीजा आवेदकों के बीच ऑनलाइन चर्चाओं से भी यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान समय में सही समय पर अपॉइंटमेंट प्राप्त करना छात्रों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है।

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