जापान की टाइप-12 मिसाइलों की तैनाती पर क्यों बिलबिला रहा चीन?

जापान ने दक्षिण-पश्चिमी कुमामोटो प्रांत में कैंप केंगुन में अपने सतह-से-जहाज में मार करने वाली टाइप-12 मिसाइलों को तैनात करने का फैसला किया है। इस फैसले से चीन बिलबिला गया है। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने इसकी निंदा करते हुए कहा है कि इस कदम से एक किल नेटवर्क बन सकता है, जो पड़ोसी देशों के तटीय और अंदरूनी दोनों तरह के लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम होगा।

दरअसल पूर्वी चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच जापान ने अपनी लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम मिसाइलों की क्षमता का विस्तार करने की तैयारी कर ली है। Type-12 मिसाइलें इसमें से ही एक है। पीएलए के मुताबिक, इनकी मारक क्षमता 200 किमी से बढ़ाकर 1000 किमी कर दी गई है।

पीएलए की रिपोर्ट में दावा
PLA आर्मी इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी के हुआ डैन और झांग ली ने इस पर अपनी रिपोर्ट साझा की है। इसके मुताबिक, जापान ने ऐसा करके विशिष्ट आक्रामक क्षमताएं और मजबूत स्टील्थ प्रदर्शन किया है।

रिपोर्ट में लिखा है कि अगर इन मिसाइलों को क्यूशू द्वीप पर तैनात किया जाता है, तो इसकी रेंज में पूरा पूर्वी चीन सागर ही नहीं, बल्कि चीन के तटीय शहर भी आएंगे। चीन को डर है कि ताइवान से संघर्ष की स्थिति में जापान इसका इस्तेमाल उसकी नौसेना को रोकने में कर सकता है।

ताइवान को लेकर तनाव
दरअसल चीन ताइवान को अपना हिस्सा बताता है। उसका कहना है कि वह इसे अपने कंट्रोल में लाने के लिए बल प्रयोग भी कर सकता है। लेकिन अमेरिका और जापान ताइवार पर किसी भी बलपूर्वक कब्जा करने की नीति के खिलाफ हैं और जापान ने साफ तौर पर कह दिया है कि अगर ताइवान पर हमला होता है, तो वह सैन्य हस्तक्षेप करेगा।

रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि जापान अपनी टाइप 12 मिसाइलों को हाइपर वेलोसिटी ग्लाइडिंग प्रोजेक्टाइल के साथ मिलाकर एक संयुक्त हमलावर क्षमता बना लेगा, जिसे जल्द ही तैनात किया जाएगा। जापान एक हाइपरसोनिक ग्लाइड हथियार को भी कैंप फ़ूजी में तैनात करने वाला है, जिसकी रेंज 500-900 किमी है और इसे बढ़ाकर 3000 किमी किया जाना है।

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