विधानसभा चुनाव के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। आयोग ने राज्य पुलिस के शीर्ष अधिकारियों से लेकर निचले स्तर के कर्मियों तक के लिए निर्देश जारी किया है।
आयोग ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जिन अपराधियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट लंबित हैं, उन्हें अगले 10 दिनों के भीतर हर हाल में गिरफ्तार किया जाए।
पुरानी फाइलों को बंद करने के निर्देश
शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने पुलिस को पिछले चुनावों के दौरान दर्ज किए गए सभी आपराधिक मामलों को तेजी से निपटाने और उनकी जांच पूरी करने का आदेश दिया है।
आयोग का मानना है कि लंबित मामले और खुले घूम रहे अपराधी चुनावी प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आयोग के अधिकार क्षेत्र की याद दिलाई
आयोग ने साफ कर दिया कि चुनाव की घोषणा के बाद राज्य के सभी सरकारी कर्मचारी और पुलिस बल वास्तव में निर्वाचन आयोग के प्रति जवाबदेह होते हैं।
आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी कर्मचारी या अधिकारी अपने कर्तव्यों में कोताही बरतता है या पक्षपात करता है, तो आयोग सीधे उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई करने का पूर्ण अधिकार रखता है।
इस संदेश से स्पष्ट है कि आयोग निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव कराने के लिए किसी भी प्रकार के प्रशासनिक ढीलेपन को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
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