चीन सीमा पर आईटीबीपी की बड़ी तैयारी

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) ने चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए अपनी सभी सीमा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून गठित की हैं।

बल ने गलवन जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ नामक नया प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी तैयार किया है। ये कदम भारत के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी चीन का मुकाबला करने के लिए उठाए जा रहे हैं।

आईटीबीपी के महानिदेशक (डीजी) शत्रुजीत सिंह कपूर ने गुरुवार को यह जानकारी दी।राजस्थान के अलवर स्थित बल के एक केंद्र में आयोजित अलंकरण समारोह के दौरान जवानों को संबोधित करते हुए कपूर ने कहा कि आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए पारंपरिक युद्ध रणनीतियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।

चीन को भारत का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी बताते हुए उन्होंने आधुनिक हथियारों, ड्रोन, ड्रोन-रोधी प्रणालियों और सीमा चौकियों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि ड्रोन एक बड़ी चुनौती भी बन गए हैं और अवसर भी। ड्रोन ऐसी तकनीक हैं, जिनके जरिए एक छोटा देश भी बड़े देश को कड़ी टक्कर दे सकता है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के साथ युद्ध में हर महीने रूस के करीब 10,000 से 15,000 सैनिक मारे जा रहे हैं।

महानिदेशक ने कहा- “यह उस देश के साथ हो रहा है जो बड़ा और महाशक्ति है। उसे लगा था कि वह यूक्रेन पर एक-दो महीने में कब्जा कर लेगा, लेकिन अब युद्ध का चौथा साल चल रहा है। ” कपूर ने ईरान-अमेरिका युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि ईरान ने वायुसेना, नौसेना या थलसेना के बिना भी वैश्विक महाशक्ति के साथ युद्ध किया।

उन्होंने कहा- “ड्रोन आने के बाद पारंपरिक सेनाओं की भूमिका बदल गई है। हमें बड़े पैमाने पर ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियां अपनानी होंगी।”

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से मिले 400 करोड़ रुपये में से 70 प्रतिशत राशि ड्रोन युद्ध क्षमता बढ़ाने पर खर्च करने की योजना है।

इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने 4,000 करोड़ रुपये की व्यापक आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसमें से 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों के लिए निर्धारित किए जाएंगे।

महानिदेशक के अनुसार, ‘स्ट्राइक’ प्रशिक्षण के तहत पूरे बल को वर्ष 2027 के अंत तक प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा ‘शौर्य कमांडो’ नामक नई लड़ाकू टीम बनाई गई है, जिसे प्रत्येक सीमा बटालियन में तैनात करने की योजना है।

उन्होंने बताया कि बदलते युद्ध हालात को ध्यान में रखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भूमिगत आश्रय और बंकर बनाए जा रहे हैं। करीब 95,000 जवानों वाला आइटीबीपी 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन एलएसी की सुरक्षा करता है। कपूर ने कहा कि बल का लक्ष्य आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशिक्षण के जरिए एक विशेष उच्च पर्वतीय युद्धक बल के रूप में विकसित होना है।

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