एक साल में गुजरात में कुल 62 शेरों, शेरनियों और उनके शावकों की अलग-अलग बीमारियों से मौत हो गई। सरकार ने इनमें संक्रमण को रोकने और समय पर इलाज देने के लिए कई कदम उठाए हैं। वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने शुक्रवार को गुजरात विधानसभा में यह जानकारी दी।
उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस विधायक शैलेश परमार के एक सवाल का जवाब देते हुए यह आंकड़े साझा किए।
मंत्री ने अपने लिखित जवाब में बताया कि एक साल में हुई 62 मौतों में 17 शेर, 17 शेरनियां और 28 शावक शामिल थे।
इनकी मौत सेप्टिसीमिया, निमोनिया और हेमोरेजिक निमोनिया, एनीमिया, हेपेटो-रीनल डिसफंक्शन या किडनी फेलियर, मल्टी-आर्गन डिसफंक्शन या फेलियर, मायोकार्डियल इन्फार्क्शन और लकवा जैसी बीमारियों के कारण हुई।
अन्य कारणों में गठिया, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, राउंडवार्म का संक्रमण, एन्सेफलाइटिस, सेंट्रल नर्वस सिस्टम की खराबी, एसाइटिस, ब्रोंको-निमोनिया, गंभीर बीमारी और सेप्टिक शाक वगैरह शामिल थे।
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