अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान ने बातचीत को लेकर अपना रुख और कड़ा कर लिया है। ईरान इस युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका के सामने कई बड़ी शर्तें रख सकता है।
तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि शांति वार्ता की दिशा में कोई भी कदम वॉशिंगटन की ओर से बड़ी रियायतों पर निर्भर करेगा।
अमेरिका के आगे ये शर्त रखेगा ईरान
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने तीन वरिष्ठ ईरानी सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान की मांगें शायद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को मंजूर न हों।
ईरान के इस युद्ध को रोकने का मुख्य आधार यह है कि किसी भी बातचीत से पहले युद्ध खत्म होना चाहिए।
इसके साथ ही भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई के न होने की गारंटी मिलनी चाहिए।
ईरान को युद्ध के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा भी मिलना चाहिए।
ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर औपचारिक नियंत्रण भी सुनिश्चित करना चाहता है।
ईरान ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर भी एक स्पष्ट रेड लाइन तय कर दी है और इस पर किसी भी तरह की पाबंदी पर चर्चा करने से इनकार कर दिया है।
ट्रंप के बातचीत के दावे को ईरान ने कर दिया था खारिज
सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि युद्ध शुरू होने बाद से पहली बार अमेरिका और ईरान के बीच बहुत मजबूत बातचीत हुई है। ट्रंप के इस दावे को ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया और ऐसी किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के उन तीन सूत्रों ने बताया कि ईरान ने केवल मध्यस्थों (जैसे पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र) के साथ शुरुआती चर्चा की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अमेरिका-इजरायल के सार्थक बातचीत के लिए माहौल है या नहीं।
पाकिस्तान में हो सकती है शांति वार्ता
पाकिस्तान के अलग-अलग सूत्रों ने संकेत दिया है कि युद्ध खत्म करने के लिए सीधी बातचीत इस हफ्ते के आखिर में इस्लामाबाद में हो सकती है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बातचीत होती है तो ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हो सकते हैं। लेकिन अंतिम फैसला लेने का अधिकार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पास ही होगा।
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