महाराष्ट्र में किसान आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या देशभर के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। ऐसे में अब इसे रोकने और किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत राज्य के कृषि विभाग ने एक विशेष टास्क फोर्स बनाने का निर्णय लिया है। इस टास्क फोर्स का काम किसानों की मानसिक स्वास्थ्य, आर्थिक कठिनाई, सामाजिक तनाव और जलवायु बदलाव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतियां बनाना होगा।
देखा जए तो राज्य सरकार की यह पहल किसानों को सिर्फ राहत देने तक सीमित नहीं, बल्कि उनके जीवन और आय को स्थायी रूप से सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। यह टास्क फोर्स आगामी राज्य विधानसभा की बजट सत्र जो कि 23 फरवरी से शुरू होने वाले है, उससे पहले बनाई गई है।
कौन करेगा टास्क फोर्स का नेतृत्व?
बता दें कि इस टास्क फोर्स का नेतृत्व एग्जेशन और ट्रेनिंग विभाग के निदेशक रफीक नाइकवाडी करेंगे। इसमें विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल होंगे, जिसमें सुनील बोरकर, उदय देशमुख, गणेश घोरपड़े, जिवन बुंदे, नंदकिशोर नैनवाड, सत्यजीत शितोले, सोनाली शिलकर, कृषि समाजशास्त्री डॉ. विनायक हेगना और महिला किसानों की मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने वाली मनोरोग विशेषज्ञ सृष्टि दोइजाद का नाम शामिल है।
इन क्षेत्रों में होगा पूरा फोकस
कृषि आयुक्त सुरज मांढरे ने बताया कि कई योजनाएं पहले से लागू हैं, लेकिन आज किसान जलवायु परिवर्तन, फसल नुकसान, आर्थिक दबाव और सामाजिक तनाव जैसी कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसलिए टास्क फोर्स ‘चार-स्तरीय समेकित दृष्टिकोण’ अपनाएगा। इसके तहत तकनीकी और कृषि में नई तकनीक, आर्थिक सहायता और स्थिरता, सामाजिक समर्थन और समुदाय सहयोग, और मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस होगा।
अब समझिए क्या है टास्क फोर्स का उद्देश्य?
बात अगर टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य की करें तो इसका उद्देश्य किसानों की आत्महत्या के कारणों का अध्ययन और शोध करना, जलवायु परिवर्तन के कृषि पर प्रभाव का विश्लेषण और समाधान सुझाना, आत्महत्या रोकने के लिए रणनीतियां बनाना, तकनीक, वित्त और मानसिक स्वास्थ्य के आधार पर मॉडल तैयार करना। इसके साथ ही आपदा पूर्व तैयारी, आपदा के समय तत्काल सहायता और आपदा के बाद पुनर्वास के लिए योजनाएं बनाना होगा।
इसके अलावा इस टास्क फोर्स का काम जिला और क्षेत्र स्तर पर कार्यान्वयन योजनाओं का निर्माण करना और सरकार, अर्ध-सरकारी संस्थाओं और NGOs के साथ समन्वय करना होगा। टास्क फोर्स के अध्यक्ष रफीक नाइकवाडी ने कहा कि वे पहले के रिपोर्टों का अध्ययन करेंगे और वर्तमान जरूरतों के अनुसार नए और आधुनिक उपाय लागू करेंगे।
अभी तक 2500 किसानों को बचाया गया
कृषि समाजशास्त्री डॉ. विनायक हेगना ने कहा कि हमारे ‘शिवार संसद’ और ‘शिवार हेल्पलाइन’ के जरिए पहले ही 2,500 किसानों को आत्महत्या से बचाया गया है। यह टास्क फोर्स नीति स्तर पर काम करने का अवसर देगा और स्थायी, वैज्ञानिक और मानवतावादी मॉडल तैयार करेगा।
गौरतलब है कि यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साल मौसम सत्र में राज्य राहत और पुनर्वास मंत्री, मकरंद जाधव पाटिल, ने किसानों को नुकसान की भरपाई और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता देने के उपाय बताए थे। इसके अलावा सरकार किसानों को फसल का उचित मूल्य, सिंचाई सुविधाएं और जिला स्तर पर काउंसलिंग सेवाएं भी दे रही है। इस टास्क फोर्स से न सिर्फ किसानों की मानसिक स्वास्थ्य और जीवन रक्षा में मदद मिलेगी, बल्कि उनके उत्पादन और आय को बढ़ाने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
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