प्रदेश में अब मिलेंगे फाइबर गैंस सिलेंडर, लोहे के मुकाबले वजन होगा आधा

प्रदेश में अब उपभोक्ताओं को लोहे के बजाय फाइबर के कंपोजिट गैस सिलेंडर मिलेंगे। इनका वजन लोहे के सिलेंडर की अपेक्षा आधा है। सिलेंडर के पारदर्शी होने की वजह से खर्च होने वाली गैस का स्तर भी दिखता रहेगा। ये सिलेंडर में 10 किलो और पांच किलो गैस भराव क्षमता के हैं।

प्रदेश में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलेंडर के घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या करीब 5.5 करोड़ है। अब कंपनियां लोहे के सिलेंडर के बजाय फाइबर सिलेंडर दे रही हैं। इसकी शुरुआत इंडियन आयल (इंडेन) ने की थी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत नोएडा, लखनऊ, वाराणसी, आगरा सहित विभिन्न शहरों में पुराने उपभोक्ताओं को प्लास्टिक के सिलेंडर दिए गए।

उपभोक्ताओं के उत्साह को देखते हुए अब नए कनेक्शन पर भी प्लास्टिक बॉडी सिलेंडर दिए जा रहे हैं। मंगलवार को भारत गैस ने भी उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में पुराने उपभोक्ताओं के लिए फाइबर सिलेंडर का वितरण शुरू कर दिया है। पहले से कनेक्शन लेने वालों को 300 रुपये और पुराना सिलेंडर अपनी एजेंसी पर जमा करना होगा। गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, लखनऊ, आगरा, वाराणसी, गोरखपुर सहित विभिन्न जिलों की एजेंसियों पर ये सिलेंडर पहुंचने लगे हैं। जल्द ही अन्य कंपनियां भी फाइबर बॉडी सिलेंडर का वितरण शुरू करने की तैयारी में हैं।

क्या है खासियत

  • घरेलू लोहे के सिलेंडर का वजन 15 किलो और गैस 14.50 किलो होने पर कुल वजन करीब 30 किलो होता था। फाइबर बॉडी सिलेंडर में 10 किलो गैस और पांच किलो का सिलेंडर होगा।
  • वजन कम होने की वजह से महिलाएं भी इसे आसानी से उठा सकेंगी और एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकेंगी।
  • अभी तक 14.50 किलो की कीमत 890 ली जाती थी। यानी एक किलो का मूल्य 61.37 रुपये हुए। ऐसे में 10 किलो का मूल्य करीब 613.70 रुपये लिया जाएगा। समय-समय पर मूल्य निर्धारण के हिसाब से कीमत बढ़ेगी अथवा घटेगी।

देख सकेंगे कितनी बैच बची है

  • फाइबर बॉडी सिलेंडर पूरी तरह से पारदर्शी है। इसमें यह दिखता रहेगा कि अभी सिलेंडर में कितनी गैस बची है?
  • इस सिलेंडर की बनावट मॉर्डन किचेन को ध्यान में रखकर किया गया है। इसमें पुराना रेगुलेटर भी लग सकेगा। रेगुलेटर प्वाइंट को आकर्षक बनाया गया है।
  • लोहे के सिलेंडर में आग लगने पर वह ब्लास्ट होता था। ऐसे में पूरा घर प्रभावित होने की आशंका रहती थी। फाइबर सिलेंडर पिघलकर नष्ट हो जाएगा।
  • यह देखने में सुंदर है। इसमें कई रंग भी है। फाइबर होने के नाते पूरी तरह से जंग प्रतिरोधी होगा।
  • इन दोनों में पुराना वाला रेग्युलेटर लगेगा। इसमें आप आसानी से देख सकेंगे कि सिलेंडर में कितनी गैस बची हुई है। फिलहाल 10 किलोग्राम वाले सिलेंडर में पुराने सिलेंडर के मुकाबले लगभग 4 किलो गैस कम आएगी।

पीएनजी का भी बढ़ रहा है दायरा
प्रदेश में पीएनजी का भी दायरा तेजी से बढ़ रहा है। राजधानी लखनऊ की गोमती नगर, इंद्रा नगर सहित कई कालोनियों में लोगों के किचन तक पाइप लाइन पहुंच गई हैं। अकेले लखनऊ में करीब 20 हजार से ज्यादा कनेक्शन् हैं। प्रदेश में वर्ष 2023 तक 1.05 करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है।

आंकड़ों से इस तरह समझिए
प्रदेश में एलपीजी वितरक करीब 4500
प्रदेश में एलपीजी बॉटलिंग प्लांट 27
प्रदेश में हर साल बढ़ते नए कनेक्शन करीब 12 लाख
प्रदेश में पीएम उज्जवला के कनेक्शन 1.75 करोड़।

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