कितने तरह के होते हैं बेली फैट- जानिए….

कई बार आप बेली फैट को जितना कम करने की सोचते हैं वह उतना बढ़ रहा होता है. इसे कम करने के लिए आपको ना जाने क्या क्या जतन करने पड़ते हैं. बेली फैट से हर कोई ही परेशान है क्योंकि ऐसे में इंसान कई बार अपने मन के कपड़े भी नहीं पहन पाता. इसके लिए आपको बेली फैट के प्रकारों के बारे में पता होना चाहिए जिसके बाद उसी तरीके से उसे कम करना चाहिए. अत्यधिक मात्रा में फैटी फूड खाने से वॉटर रिटेंशन हो जाता है जिसकी वजह से बेली फैट बनने लगता है. हम आपको बताने जा रहे हैं कि बेली फैट कितने तरह के होते हैं.  

 

 

पोस्टपार्टम बेली: प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं के पोस्टपार्टम बेली विकसित हो जाता है. इस तरह की बेली गर्भाशय के भारी हो जाने की वजह से होता है. इस दौरान आपका पेट सामान्य होने में समय लगता है. प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़े बेली फैट को कम करने के लिए बच्चे के जन्म के 3 महीने बाद एक्सरसाइज करना शुरु कर देना चाहिए.

सबक्यूटेनियस फैट: इस तरह का फैट त्वचा के नीचे एकत्रित होता है. खासकर कमर, जांघ और कूल्हों पर. सबक्यूटेनियस फैट आपके शरीर की शेप को खराब कर देता है. इस तरह के फैट को कम करने में काफी समय लगता है.

स्ट्रेस बेली: तनाव की वजह से भी बेली फैट बन जाता है. लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने और उसी जगह पर बैठकर खाने की वजह से आपकी बेली पर फैट इकट्ठा होने लगता है. तनाव के साथ अस्वस्थ खान-पान की वजह से भी बेली फैट बढ़ जाता है.

लोअर बेली बल्ग: इस तरह का फैट ज्यादातर महिलाओं को प्रभावित करता है. एक ही एक्सरसाइज हमेशा करना और वहीं डाइट का लंबे समय तक सेवन करने की वजह से लोअर बेली बल्ग बनने लगता है. इसकी वजह से आपके शरीर का ऊपरी हिस्सा सही शेप में होता है मगर शरीर के निचले हिस्से की शेप खराब हो जाती है.

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