मध्य प्रदेश में फरवरी का महीना इस बार सूखा नहीं, बल्कि बार-बार बदलते मौसम के लिए याद रखा जाएगा। प्रदेश में एक बार फिर बादलों की सक्रियता बढ़ गई है। पूर्वी जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। यह इस महीने चौथा मौका होगा, जब प्रदेश के कई हिस्सों में वर्षा दर्ज हो सकती है।मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र और उससे जुड़ी द्रोणिका प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर रही है। इसके असर से सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, मंडला, डिंडौरी और बालाघाट जिलों में बादल छाने और बारिश होने के आसार हैं। कुछ स्थानों पर तेज हवा के साथ बिजली गिरने की भी आशंका है।
पश्चिमी विक्षोभ से बदला समीकरण
पहले पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव प्रदेश पर पड़ने की संभावना थी, लेकिन वह तंत्र आगे बढ़ गया। इसी बीच बंगाल की खाड़ी से उठी नई मौसमी हलचल ने पूर्वी मध्य प्रदेश का रुख कर लिया। इसके कारण मौसम का मिजाज अचानक बदल गया और बूंदाबांदी की स्थिति बनी।
फसलों पर दोबारा संकट
फरवरी की शुरुआत से ही प्रदेश में तीन बार ओलावृष्टि और वर्षा हो चुकी है। कई जिलों में आंधी और बारिश से गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें प्रभावित हुई थीं। प्रशासन द्वारा सर्वे भी कराया गया। 18 फरवरी से शुरू हुआ तीसरा दौर 21 फरवरी तक चला। अब एक और वर्षा की संभावना किसानों की चिंता बढ़ा रही है। 23 फरवरी के आसपास फिर से असर दिख सकता है।
दिन में ठंडक, रात में नरमी
लगातार बादल और नमी के कारण दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि रात के तापमान में हल्की बढ़ोतरी से सर्दी में कुछ राहत मिली है। शनिवार-रविवार की रात पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 10.2 डिग्री दर्ज हुआ। राजगढ़ में 11 डिग्री, कल्याणपुर में 11.2 डिग्री, करौंदी में 11.4 डिग्री और मंदसौर में 11.5 डिग्री तापमान रहा। अन्य शहरों में भी पारा सामान्य से नीचे दर्ज किया गया। फरवरी के अंतिम सप्ताह में भी मौसम का अस्थिर रूप बना रह सकता है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और खुले स्थानों पर बिजली गिरने की आशंका के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है।
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