अरविंद केजरीवाल सरकार की ओर से महीने में 20 हजार लीटर पानी के बाद अब दौ सौ यूनिट बिजली भी फ्री कर दी गई है. वहीं मेट्रो में भी महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा देने की योजना पर काम चल रहा है. ऐसे में बिजली, पानी और मेट्रो में मुफ्त यात्रा की घोषणाओं से दिल्ली सरकार के खजाने पर आने वाले वक्त में और बोझ बढ़ेगा.
वजह कि सरकार को मुफ्त की घोषणाओं से हुए नुकसान की भरपाई सब्सिडी देकर पूरी करनी पड़ेगी. दिल्ली सरकार के कुल बजट का आकार करीब 60 हजार करोड़ रुपये तक का है.
मुफ्त बिजली पर अब सरकार को ढाई हजार करोड़ रुपये सालाना की सब्सिडी देनी पड़ेगी. पानी पर करीब साढ़े चार सौ करोड़ रुपये सब्सिडी पहले से दी जा रही है. मुफ्त मेट्रो सफर की भी सुविधा शुरू हुई तो 1500 करोड़ से 2000 करोड़ रुपये की और सब्सिडी बढ़ेगी.
अब तक चार सौ यूनिट बिजली के बिल में दिल्ली सरकार 50 प्रतिशत तक छूट देती थी. तब 1600-1700 करोड़ रुपये की सब्सिडी सरकार को बिजली कंपनियों को देनी पड़ती थी. मगर अब दौ सौ यूनिट तक बिजली उपभोग को सरकार ने मुफ्त कर दिया है. इन उपभोक्ताओं के लिए फिक्स्ड चार्ज भी हटा दिया गया है. बताया जा रहा है कि इससे सरकार से मिलने वाली सब्सिडी का आंकड़ा ढाई हजार करोड़ रुपये सालाना पहुंच जाएगा.
अरविंद केजरीवाल सरकार के फैसले से दिल्ली में 26 लाख उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा. विभागीय आंकड़े के मुताबिक दिल्ली में वर्ष 2018-19 में दो सौ यूनिट के बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 26 लाख है वहीं दौ सौ से चार सौ यूनिट वाले उपभोक्ताओं की संख्या 14 लाख है. दिल्ली में कुल 47 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं. बिजली विभाग के अधिकारी बताते हैं कि चार सौ यूनिट तक 50 प्रतिशत छूट देने के फैसले के कारण केजरीवाल सरकार को हर साल 1600-1700 करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ता था.
बता दें कि फरवरी, 2015 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चार सौ यूनिट तक बिजली बिल में 50 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की थी.
वहीं महीने में 20 हजार लीटर तक पानी का बिल भी माफ कर दिया था. आंकड़ों को देखें तो 2015-16 में सरकार ने पानी और बिजली सब्सिडी के लिए 1,690 करोड़ जारी किए थे. सिर्फ पानी की सब्सिडी पर करीब 450 करोड़ वार्षिक खर्च होते हैं. 2018-19 में अरविंद केजरीवाल सरकार ने 1699 करोड़ रुपये सिर्फ बिजली की सब्सिडी के लिए जारी किए थे.