अदाणी मामले पर अमेरिकी न्याय विभाग का बड़ा बयान

 अमेरिकी न्याय विभाग ने भारतीय अरबपति गौतम अदाणी और अन्य सात लोगों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को वापस लेने के अपने निर्णय का मजबूती से बचाव किया है।

विभाग ने एक फेडरल जज की अदालत में दाखिल 10 पेजों के दस्तावेज में कहा कि अभियोजन कानूनी रूप से दोषपूर्ण, कूटनीतिक रूप से नुकसानदेह और ट्रंप प्रशासन की इंफोर्समेंट प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं था। इसे एक साल पहले ही बंद कर दिया जाना चाहिए था या फिर इसे शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था।

डीओजे का यह जवाब तब आया जब अमेरिकी जिला जज निकोलस गरौफिस ने विभाग से जानना चाहा था कि वह चार्जशीट को हमेशा के लिए क्यों खत्म करना चाहता है। डीओजे की पहले की याचिका में केस को खत्म करने की वजह स्पष्ट तौर पर नहीं बताई गई थीं। इसलिए उन्होंने विभाग से अपने फैसले के पीछे की वजहों की पूरी जानकारी मांगी थी।

असल में 2024 में अमेरिका की पिछली बाइडन सरकार के दौरान डीओजे ने अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी और अन्य के खिलाफ आरोप लगाया था कि वे भारतीय सरकारी अधिकारियों को 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर की रिश्वत देने और अन्य संस्थाओं से अरबों डॉलर के निवेश प्राप्त करने के लिए निवेशकों से झूठ बोलने की एक साजिश में शामिल थे। इस दौरान अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने अमेरिकी निवेशकों से कम से कम 17.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर जुटाए थे।

डीओजे ने अदालत में दायर जवाब में कहा कि यह मुख्य रूप से एक विदेशी मामला है। इसमें भारतीय नागरिक, भारत सरकार के कान्ट्रैक्ट और भारत की बिजली व्यवस्था शामिल है। डीओजे का तर्क था कि अमेरिका को दुनिया की पुलिस नहीं बनना चाहिए और भारत अपने आंतरिक सिस्टम को खुद संभाल सकता है।

भारतीय अधिकारियों ने पहले ही इस मामले की जांच कर ली है और कोई गैर-कानूनी गतिविधि नहीं पाई है। इसमें आगे कहा गया कि अमेरिकी निवेशकों का कोई पैसा नहीं डूबा है। उनके लोन या तो पूरी तरह चुका दिए गए हैं या अभी भी सक्रिय रूप से मैनेज किए जा रहे हैं। साथ ही कहा कि धोखाधड़ी के आरोपों का कोई मजबूत कानूनी आधार नहीं है।

उन्होंने निवेशकों के सामने कंपनी के बयानों को आम कॉर्पोरेट की बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बातें करार दिया।

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