Ramadana 2026: रोजे में क्या करें और किन बातों से बचें? जान लें जरूरी नियम

रोजा रखने के सही नियम और कायदे क्या हैं? सेहरी के समय से लेकर इफ्तार की दुआ तक, और दान-पुण्य (जकात) से लेकर नेक व्यवहार तक, रोजे से जुड़ी हर छोटी-बड़ी और जरूरी बात जानें। पहली बार रोजा रखने वाले किन बातों का खास ख्याल रखें, किन गलतियों से बचें और अपनी इबादत को कैसे मुकम्मल करें?

रमजान का पाक महीना इस्लाम में सबसे ज्यादा बरकत और इबादत वाला माना जाता है। यह सिर्फ भूख-प्यास सहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने मन और अपनी इच्छाओं पर काबू पाने का एक जरिया है। आइए जानते हैं रमजान के दौरान क्या करना चाहिए और किन बातों से परहेज करना जरूरी है।

रोजा शुरू करने का सही तरीका
रोजा रखने की शुरुआत सुबह सूरज निकलने से पहले होती है, जिसे ‘सेहरी’ कहते हैं। सेहरी में ऐसा खाना खाना चाहिए जो दिन भर आपको ऊर्जा दे सके। रोजा रखने से पहले ‘नियत’ करना सबसे जरूरी है। नियत का मतलब है दिल में यह पक्का इरादा करना कि आप सिर्फ ईश्वर की रजा के लिए रोजा रख रहे हैं।

शाम को सूरज ढलने के बाद रोजा खोला जाता है, जिसे ‘इफ्तार’ कहते हैं। खजूर से रोजा खोलना सेहत के लिहाज से बेहतरीन माना जाता है।

रमजान में क्या करें (Do’s)
पांच वक्त की नमाज: रोजे के साथ नमाज पढ़ना जरूरी है। यह आपको अनुशासन और मानसिक शांति देता है।

कुरान पढ़ना: इस महीने में कुरान पढ़ना और उसके अर्थ को समझना बहुत पुण्य का काम माना जाता है।

जकात और सदका (दान): रमजान हमें दूसरों का दर्द समझना सिखाता है। इसलिए, गरीबों की मदद करना और उन्हें खाना खिलाना इस महीने का अहम हिस्सा है।

सब्र और तहजीब: रोजे का असली मकसद गुस्से पर काबू पाना और हर हाल में शुक्रगुजार रहना है।

किन बातों से बचें (Don’ts)
झूठ और बुराई: किसी की पीठ पीछे बुराई करना या झूठ बोलना रोजे की रूह को नुकसान पहुंचाता है।

लड़ाई-झगड़ा: रोजे की हालत में किसी से लड़ना या अपशब्द कहना सख्त मना है। इससे रोजे का सवाब (पुण्य) खत्म हो जाता है।

जानबूझकर खाना-पीना: अगर आप भूलकर कुछ खा या पी लेते हैं, तो रोजा नहीं टूटता। लेकिन, जानबूझकर थोड़ा सा भी पानी पीना रोजे को अमान्य कर देता है।

सिर्फ पेट का रोजा नहीं: याद रखें, रोजा सिर्फ पेट का नहीं बल्कि आंखों, कानों और जुबान का भी होता है। गलत चीजें देखने या सुनने से बचें।

किसे रोजे से छूट मिलती है?
इस्लाम में रोजा फर्ज है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट भी दी गई है। जो लोग बीमार हैं, बहुत बुजुर्ग हैं, यात्री (मुसाफिर) हैं, या गर्भवती महिलाएं हैं, उन्हें रोजा न रखने की अनुमति है। हालांकि, बाद में उन्हें इसकी ‘कजा’ (छूटे हुए रोजे के बदले रोजा रखना) पूरी करनी होती है।

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