Freddy Daruwala ने पेड PR ट्रेंड पर कसा तंज

हिंदी सिनेमा में कई कलाकार रहे जिन्‍होंने शुरुआत खलनायक के तौर पर भी की और उसके बाद उनके कदम विविध किरदारों को निभाने की आरे बढ़े। उन्‍होंने खुद को सिर्फ नकारात्‍मक किरदारों में सीमित नहीं रखा।

अभिनेता फ्रेडी दारुवाला (Freddy Daruwala) भी उसमें शुमार होते हैं। उन्‍होंने फिल्‍म हॉलिडे (Holiday) में खलनायक के तौर पर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। धीरे-धीरे उन्‍होंने खुद को अलग भूमिकाओं में आजमाया ताकि वह टाइपकास्‍ट न हो जाए।

टाइपकास्ट होने का लगता है डर
आगामी दिनों में फिल्‍म द वाइव्‍स (The Wives) में नजर आने वाले फ्रेडी कहते हैं, “मैंने उस फिल्‍म (हॉलिडे) से सीखा कि जब आप किसी खास किरदार के साथ सुपरहिट फिल्म करते हैं, तो उसके फायदे और नुकसान हमेशा साथ रहते हैं। मुझे तब भी इस बात का डर था और आज भी है कि कहीं मैं टाइपकास्ट न हो जाऊं। बहुत सारी फिल्मों और प्रोजेक्ट्स आए हैं जिसमें टाइपकास्ट की संभावना थी, लेकिन उसे तोड़ना भी मेरे हाथ में ही था और उसके हवाले करना भी मेरे हाथ में था।

10 सालों में सीखी ये बात
एक बात मैंने पिछले दस वर्षों में इंडस्ट्री में सीखी है कि एक अभिनेता की महत्वाकांक्षा, अहमियत और स्वीकार्यता इन तीनों के बीच वह लगातार झूलता रहता है। महत्‍वाकांक्षा तो रहती है, बहुत कुछ करना होता है, लेकिन एक हद तक यह स्वीकार भी करना पड़ता है कि जो मिल रहा है, वही करना है क्योंकि हम बाहर से आए हुए लोग हैं, यहां (मुंबई) बहुत खर्चे होते हैं। खुद को इस पिच पर बनाए रखना बहुत जरूरी होता है।

जो आप करना चाहते हैं और जो आपको मिल रहा है, उसमें से ही चुनना होता है। तो निश्चित रूप से मैंने कोशिशें की हैं, और मेरी कोशिशें सफल हो रही हैं या विफल दोनों का ही श्रेय मुझे जाएगा। उन्‍होंने आगे कॉमेडी फिल्‍म करने की भी इच्‍छा जताई।

काम के लिए नहीं देखते हैं समय और दिन
फ्रेडी पिता भी हैं। ऐसे में परिवार के साथ समय बिताने को लेकर तयशुदा कार्य अवधि करने को लेकर वह कहते हैं, “अपने काम को शिद्दत से करना हमारा कर्तव्‍य है। हमारे साथ हमारा काम ही नहीं जुड़ा, सेट पर 250 लोग होते हैं जिनका काम हमसे जुड़ा हुआ होता है। तो ऐसे में जिम्‍मेदारी ज्‍यादा लेनी होती है। हमें सुनिश्चित करना होता है जो भी काम कर रहे हैं अच्‍छे से हो ताकि सबका संतुलन बना रहे। उसके चलते घंटे और दिन नहीं देखे जाते, बस काम ही देखा जाता है।

PR टैक्टिक्स पर बोले फ्रेडी
कलाकार इन दिनों अपने पीआर पर भी काफी जोर दे रहे हैं। खुद को हर जगह दिखाने के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं। इस बढ़ते चलन को लेकर फ्रेडी कहते हैं कि जरूरी नहीं पेड पीआर करके काम मिल जाएगा। इन दिनों प्रसिद्ध होना अलग चीज है। जरूरी नहीं कि जो प्रसिद्ध है वो टैलेंटेड है और जो टैलेंटेड है वो प्रसिद्ध है। इन दोनों का भेद इंडस्‍ट्री धीरे-धीरे जानने लगी है। अगर किसी को लगता है ज्‍यादा पीआर से उन्‍हें प्रसिद्धि मिल सकती है तो उन्‍हें उसे करना चाहिए।

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