CIA ने जिस प्लान को बताया फर्जी, ट्रंप ने उसे ही दे दी मंजूरी

 अमेरिका में ईरान के खिलाफ युद्ध के फैसले को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने यह फैसला आनन-फानन में लिया, जबकि खुफिया एजेंसी सीआईए ने इस प्लान को फर्जी बताया था।

दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका में ईरान के खिलाफ युद्ध का फैसला तनाव और अनिश्चितता के बीच लिया गया। इसकी शुरुआत व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में एक अत्यंत गोपनीय बैठक से हुई, जिसमें इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मोसाद प्रमुख ने एक साझा सैन्य अभियान का प्रस्ताव रखा।

नेतन्याहू के दावे पर ट्रंप ने लगाई मुहर

नेतन्याहू का मुख्य दांव ‘रेजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) पर था। उन्होंने दावा किया कि भारी बमबारी से ईरान का मिसाइल प्रोग्राम तबाह हो जाएगा और वहां की जनता सड़कों पर उतरकर शासन को उखाड़ फेंकेगी। सत्ता परिवर्तन के इसी विचार ने ट्रंप को प्रभावित किया।

सीआईए को प्लान पर था शक

हालांकि, इस प्लान पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए इस योजना पर यकीन नहीं था। सीआईए प्रमुख रैटक्लिफ ने आशंका व्यक्त की और जन-विद्रोह और सत्ता परिवर्तन के दावों को ‘फर्जी’ करार दिया, जबकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस पर कड़ा संदेह जताया। अमेरिकी सेना का मानना था कि इजरायल अक्सर अपने सैन्य लक्ष्यों को ‘ओवरसेल’ करता है ताकि अमेरिका को युद्ध में खींच सके।

और ऐसे बदल गया खेल

लेकिन एक नई खुफिया जानकारी ने खेल बदल दिया। सूचना मिली कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह तेहरान में बैठक करने वाले हैं। ट्रंप ने इसे ईरानी नेतृत्व को खत्म करने के दुर्लभ मौके के रूप में देखा और आखिरकार 26 फरवरी की बैठक में तमाम मतभेदों के बावजूद ट्रंप ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को हरी झंडी दे दी।

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