डिजिटल विज्ञापन और मार्केटिंग के तेजी से बदलते दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने कारोबारियों के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। वहीं, एआई के कारण नौकरियों पर पड़ने वाले असर और फेक न्यूज व डीपफेक जैसी चुनौतियां भी चर्चा में हैं।
टेडएक्स के मंच पर चंडीगढ़ में गूगल एड्स साॅल्यूशंस के कंट्री हेड अंकित शर्मा से एआई, डिजिटल विज्ञापन, छोटे कारोबारियों और आने वाले समय में इसके प्रभाव को लेकर दैनिक जागरण के वरिष्ठ संवाददाता बलवान करिवाल ने बातचीत की।
अंकित शर्मा का कहना है कि एआई पूरी तरह से इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि काम करने की दक्षता बढ़ाएगा। उनके अनुसार भविष्य में एआई काम करेगा, लेकिन उसे दिशा देने और लीड करने की भूमिका इंसान की होगी।
सवाल : डिजिटल मार्केटिंग तेजी से बढ़ रही है। एआई के इस्तेमाल से इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब : जॉब्स मार्केट में रहेंगी। ऐसा नहीं होगा कि एआई पूरी तरह से टेकओवर कर लेगा और सारा काम वही करने लगेगा। बहुत से ऐसे काम हैं, जहां ह्यूमन प्रेजेंस जरूरी होती है। अगर आप कोई काम मशीन पर छोड़ते हैं तो वह एक स्तर तक उसे करके देगी, लेकिन उसके आगे अगर आपको कुछ कस्टमाइज करना है, किसी विशेष संदर्भ के अनुसार उसमें बदलाव करना है तो वहां इंसान की जरूरत होगी।
एक कॉन्सेप्ट है ह्यूमन इन द लूप। लेकिन आगे चलकर यह ह्यूमन इन द लीड हो सकता है। यानी एआई एजेंट और एआई आपके लिए काम करेंगे, लेकिन एक इंसान उन्हें लीड करेगा, उन्हें स्टियर करेगा और आगे की दिशा तय करेगा। नौकरियों में एफिशिएंसी जरूर आएगी। बहुत से काम ऑटोमेट होंगे, लेकिन ऐसा नहीं होगा कि पूरा वर्कफोर्स खत्म हो जाएगा।
सवाल : छोटे कारोबारी और छोटे शहरों के दुकानदार एआई का इस्तेमाल किस तरह कर सकते हैं?
जवाब : छोटे कारोबारियों के लिए अब बहुत सी चीजें आसान हो गई हैं। एआई ने जानकारी और तकनीक को सभी के लिए उपलब्ध कराया है। अब अंतर इस बात से पड़ेगा कि आप उसका इस्तेमाल कैसे और किस काम के लिए करते हैं।
अगर आपका छोटा कारोबार है और आप उसे प्रमोट करना चाहते हैं तो Google के कई ऐसे टूल हैं, जिनसे कुछ ही मिनट में विज्ञापन तैयार किया जा सकता है। पहले ब्रांड को विज्ञापन बनाने के लिए मॉडल या अभिनेता तलाशने पड़ते थे और काफी खर्च करना पड़ता था।
अब अगर आपके पास अपने उत्पाद की फोटो है और प्रेरणा के लिए एक-दो मॉडल की तस्वीरें हैं तो एआई टूल की मदद से विज्ञापन तैयार किया जा सकता है। इससे कारोबारियों का समय और खर्च दोनों बच सकता है।
सवाल : क्या एआई सिर्फ विज्ञापन बनाने में ही मदद करेगा या कारोबार चलाने में भी उपयोगी है?
जवाब : कारोबार चलाने के लिए भी बहुत से टूल उपलब्ध हैं। गूगल के एंटरप्राइज टूल्स की मदद से बिजनेस के कई कामों को अधिक सहज और व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकता है। यानी एआई सिर्फ विज्ञापन बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कारोबार के अलग-अलग हिस्सों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
सवाल : सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और एआई से तैयार भ्रामक विज्ञापन बढ़ रहे हैं। इससे लोगों को बचाने के लिए क्या किया जा सकता है?
जवाब : प्राइवेसी और फ्रॉड प्रिवेंशन के लिए कई तरह के प्रोडक्ट और सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। आज सोशल मीडिया पर बहुत सारा फेक कंटेंट जा रहा है। एआई से तैयार किए गए कंटेंट की पहचान के लिए भी तकनीकी स्तर पर काम हो रहा है। गूगल के एआई टूल्स से तैयार कंटेंट में उसकी पहचान से जुड़ा मार्क रहता है, जिससे वास्तविक और एआई से तैयार सामग्री के बीच अंतर करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा डेटा फ्रॉड और फाइनेंशियल फ्रॉड से बचाव के लिए भी कई उपाय किए गए हैं। Android इकोसिस्टम में भी फ्रॉड प्रिवेंशन के लिए सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है।
सवाल : डीपफेक और एआई जनरेटेड कंटेंट के दौर में आम व्यक्ति कैसे पता लगाए कि क्या सही है और क्या गलत?
जवाब : यह मुश्किल है। हर इंसान के लिए यह पहचानना आसान नहीं होगा कि कौन सा कंटेंट सही है और कौन सा गलत। इसलिए मैं यही कहूंगा कि जो दिखाई दे रहा है, उस पर तुरंत विश्वास न करें। थोड़ा अपना विवेक इस्तेमाल करें। केवल जो दिख रहा है, उसके आधार पर कोई निष्कर्ष निकालकर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
सवाल : भारत में डिजिटल विज्ञापन तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले पांच वर्षों में भारत को आप इस क्षेत्र में किस तरह देखते हैं?
जवाब : भारत डिजिटल विज्ञापन में कई जगहों से काफी आगे है। छोटे कारोबार हों या बड़े कारोबार, सभी तेजी से डिजिटल की ओर बढ़ रहे हैं। पहले टीवी और बिलबोर्ड प्रमुख माध्यम थे, लेकिन अब यूजर मोबाइल पर शिफ्ट हो गया है। सर्च, YouTube और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोग अपना काफी समय बिताते हैं।
इसलिए अब विज्ञापन के पूरे इकोसिस्टम को उसी हिसाब से तैयार करना होगा। मार्केटर्स को यह देखना होगा कि उनका यूजर किस प्लेटफॉर्म पर मौजूद है और किस समय वहां सक्रिय है। इसके बाद उसी हिसाब से विज्ञापन का टचप्वाइंट तय करना होगा।
सवाल : छोटे दुकानदार इस बड़े डिजिटल बाजार में खुद को कैसे स्थापित कर सकते हैं?
जवाब : सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि छोटे दुकानदार का बिजनेस मॉडल क्या है। हर छोटे दुकानदार के लिए विज्ञापन करना जरूरी नहीं है। लेकिन अगर वह अपने कारोबार को एक शहर से दूसरे शहर तक विस्तार देना चाहता है तो डिजिटल प्लेटफॉर्म उसके लिए काफी उपयोगी हो सकते हैं।
यूट्यूब एक अच्छा प्लेटफॉर्म है। वहां अपने कारोबार की ब्रांडिंग की जा सकती है और लोगों में जागरूकता पैदा की जा सकती है। सबसे पहले लोगों को बताना जरूरी है कि आपका कारोबार क्या है और आप क्या सेवा या उत्पाद दे रहे हैं। जब लोग आपको और आपके कारोबार को जानने लगते हैं, तो उसके बाद बिजनेस बढ़ाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
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