आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि सरकार एक महीने के भीतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के रेगुलेशन पर परामर्श पत्र जारी करेगी। इसमें एआई सुरक्षा, डीपफेक, मानव-केंद्रित दृष्टिकोण जैसे प्रमुख पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह परामर्श पत्र एआई के रेगुलेशन के लिए बुनियाद का काम करेगा और अब समय आ गया है कि भारत में इस तरह की रूपरेखा तैयार की जाए।
वैष्णव ने विश्व विकास रिपोर्ट जारी किए जाने के मौके पर कहा- ‘मैं मंत्रालय से अनुरोध करूंगा कि वह नियमन पर केंद्रित एक परामर्श पत्र लेकर आए, जिसमें सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए। एआई के उपयोग से जुड़ी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।’
उन्होंने कहा कि परामर्श पत्र में डीपफेक समेत एआई से होने वाले नुकसान, मानव-केंद्रित दृष्टिकोण और कौशल विकास जैसे विषय भी शामिल होंगे।
वैष्णव ने डीपफेक को एक ऐसी परेशानी बताया जोकि समाज में बड़ी समस्याएं पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि चिंताजनक यह है कि डीपफेक की गुणवत्ता में हर दिन सुधार भी हो रहा है।
उन्होंने कहा- ‘लोग उन पर विश्वास करते हैं और इससे पूरी तरह गलत परंपरा बनती है। यह पूरी तरह गलत धारणा पैदा करता है और लोगों को गलत काम करने तथा गलत बातों पर विश्वास करने के लिए उकसाता है।’
बता दें कि डीपफेक, एआई और डीप लर्निंग से बनाया गया ऐसा डिजिटल वीडियो, आडियो या फोटो होता है, जोकि पूरी तरह से नकली होने के बावजूद बिल्कुल असली जैसा लगता है।
वैष्णव ने कहा कि एआई और अन्य प्रौद्योगिकियों को केवल कानून के जरिये नियंत्रित नहीं किया जा सकता। हमें प्रौद्योगिकी और कानूनी उपायों को मिलाकर समाधान निकालना होगा। इस प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों को साथ लेकर चलना होगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस दिशा में उद्योग को मुख्य जिम्मेदारी उठानी होगी।
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