आतंकवाद को लेकर UN में भारत ने उतारा पाकिस्तान का नकाब

दुनिया के सामने इस्लामाबाद के दोहरे रवैये को उजागर करते हुए भारत ने कहा है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद का जो ‘फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर’ (भस्मासुर) बनाया था उस पर उसका नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो चुका है। उसका पाला हुआ भस्मासुर अब उन्हीं लोगों पर हिंसक हमले कर रहा है जिन्होंने इसे बनाया था।

बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत के मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी राघू पुरी ने कहा, “पाकिस्तान ने खुद को आतंकवाद से लड़ने वाले देश और पीड़ित के तौर पर पेश किया है लेकिन वह इस बात को छिपाता रहा है कि पाकिस्तानी सरकार ने जिन ‘फ्रेंकस्टीन’ (खतरनाक राक्षसों) को बनाया और जिन पर से अपना कंट्रोल खो दिया वे अब पड़ोसी देशों में तबाही मचाने के बाद पाकिस्तान में भी वही सब कर रहे हैं।”

‘पाकिस्तानी नेता ने ही उजागर किया काला सच’
उन्होंने कहा, “हाल ही में पाकिस्तान की एक प्रांतीय मुख्यमंत्री ने इस बात का खुलासा किया था। मैं अपने साथियों को 2018 में उनके पिता और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री के उस इंटरव्यू की याद दिलाना चाहूंगा जिसमें इस काले सच को उजागर किया गया था।” पुरी ने चेतावनी देते हुए कहा, “आप एक ही समय में दो विरोधी पक्षों का साथ नहीं दे सकते। असलियत ऐसी नहीं होती।”

यूएन जनरल असेंबली की छठी कमिटी (जो कानूनी मामलों को देखती है) की कार्यवाही के दौरान पुरी पाकिस्तान के डिप्टी परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव उस्मान जादून द्वारा नई दिल्ली के खिलाफ बिना किसी उकसावे के की गई तीखी आलोचना के जवाब में भारत का पक्ष रख रहे थे।

किस नेता की बात कर रहे थे पुरी?
पाकिस्तान के राजनीतिक ढांचे के अंदरूनी विरोधाभासों को उजागर करते हुए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने पिछले महीने लाहौर में कहा, “दुर्भाग्य से 13 करोड़ की आबादी वाले पंजाब प्रांत को खतरा मेरे पड़ोसी देशों से कम और मेरे पड़ोसी प्रांतों से ज्यादा है।”

2018 में डॉन अखबार को दिए एक इंटरव्यू में उनके पिता और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने साफ तौर पर माना था कि मुंबई में 26/11 के आतंकी हमले की साजिश में उनके देश का हाथ था। उन्होंने कहा था, “चरमपंथी संगठन सक्रिय हैं। उन्हें नॉन-स्टेट एक्टर्स (गैर-सरकारी तत्व) कहें। क्या हमें उन्हें बॉर्डर पार करके मुंबई में 150 लोगों की जान लेने देनी चाहिए?”

पाकिस्तान के मनगढ़ंत दावों को किया खारिज
इस्लामाबाद के सैन्य नतीजों को लेकर गलतफहमी भरे रवैये का मजाक उड़ाते हुए पुरी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत के खिलाफ अपनी कथित जीत के बारे में पाकिस्तान के मनगढ़ंत दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “अगर बमबारी से बर्बाद हुए एयरफील्ड और गड्ढों वाले रनवे पाकिस्तान को जीत जैसे लगते हैं तो बेशक वे इसका आनंद ले सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के नतीजों पर पाकिस्तानी सेना के नैरेटिव को गलत तरीके से पेश करने की पाकिस्तानी प्रतिनिधि की बेताबी असल में राज्य-प्रायोजित गलत सूचना और मनोवैज्ञानिक धोखे की उनकी पुरानी मशीनरी का ही हिस्सा थी।

‘धर्म पूछकर चलाईं गोलियां’
पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि कैसे जिहादियों ने हिंदू और ईसाई पर्यटकों को मारने से पहले उनकी धार्मिक पहचान पूछी और उन्हें खास तौर पर निशाना बनाया।

उन्होंने कहा, “पहलगाम में पीड़ितों से उनकी राजनीतिक विचारधारा के बारे में नहीं पूछा गया। उनसे उनके धर्म के बारे में पूछा गया।” उन्होंने जोर देकर कहा, “इसलिए यह बहुत बड़ी विडंबना है कि पाकिस्तान धार्मिक नफरत से लड़ने की बात तो करता है लेकिन साथ ही ऐसे हालात भी बनाए रखता है जिनसे यह नफरत बनी रहे और पनपे, खासकर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देकर।”

उन्होंने कहा, “अगर नैरेटिव बनाने, गलत जानकारी फैलाने और दुष्प्रचार करने के बजाय आतंकवाद का मुकाबला करने में इतनी कोशिश की गई होती तो दुनिया एक बेहतर जगह होती।” उन्होंने कहा, “जब मीडिया मसूद अजहर तक पहुंच सकता है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की कामयाबी के बारे में उससे पुष्टि कर सकता है तो जाहिर है कि पाकिस्तानी सरकार को उसके ठिकाने का पता होगा।”

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