नेपाल में अधिकारियों ने भोटेकोशी-त्रिशूली-नारायणी बाढ़ के अज्ञात पीड़ितों के शवों को डीएनए और फोरेंसिक सबूत इकट्ठा करने के बाद दफनाना शुरू कर दिया है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि मुर्दाघर भर गए थे और नदी में दूर बहकर मिले शवों की पहचान करना मुश्किल होता जा रहा था।
रविवार शाम जारी एक अपडेट में बताया गया कि अभी भी शव मिलने का सिलसिला जारी है और 650 से ज्यादा शवों में से केवल 29 की ही पहचान हो पाई है। नेपाल पुलिस के मुताबिक, बरामद हुए शुरुआती 669 शवों में से 211 बुरी तरह क्षतिग्रस्त, अधूरे या कटे-फटे थे। पुलिस ने कहा, “कई शव दो से तीन दिनों तक मोटी कीचड़ और पानी के नीचे दबे रहे।”
चितवन बना बड़ा केंद्र
रसुवा से बहकर आए शव नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी में मिले। ये जगहें अक्सर उन जगहों से काफी दूर थीं जहां से पीड़ित लापता हुए थे। चितवन सबसे बड़ा केंद्र बन गया। रविवार तक वहां त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारे 259 शव मिले थे लेकिन उनमें से सिर्फ नौ की ही पहचान हो पाई।
अधिकारियों ने पोस्टमार्टम और डीएनए सैंपल लेने के बाद बिना पहचान वाले शवों को देवघाट जंगल में दफनाना शुरू किया। पहले बैच में 26 शवों को जमीन के नीचे दफनाया गया।
पूरी प्रक्रिया के बाद दफनाए गए शव
यह प्रक्रिया इस तरह से बनाई गई थी कि दफनाने के बाद भी परिवार की तलाश खत्म न हो। हर शव को एक पहचान नंबर दिया गया। तस्वीरें, शारीरिक विशेषताएं, कपड़े, गहने और अन्य सामान का रिकॉर्ड रखा गया। साथ ही डीएनए, उंगलियों के निशान और अन्य फोरेंसिक सैंपल सुरक्षित रखे गए।
दफनाने की जगहों को जियो-टैग किया गया ताकि अगर रिश्तेदार पहचान की पुष्टि कर लें तो बाद में शव के अवशेषों का पता लगाकर उन्हें निकाला जा सके।
गोरखा जिले में भी डीएनए सैंपल लेने के बाद 29 अज्ञात शवों और शरीर के अंगों को दफनाया गया। मुख्य जिला अधिकारी तुलसी प्रसाद श्रेष्ठ ने कहा, “गोरखा में शव रखने की पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं और हर दिन शव मिल रहे हैं।”
पीड़ितों के परिजनों का लगा तांता
नवलपरासी ईस्ट ने भी रविवार को इसी तरह की प्रक्रिया शुरू की, जिसमें फोरेंसिक सैंपलिंग और पहचान नंबर देने के बाद 20 अज्ञात शवों को जमीन में दफनाया गया। परिवारों के लिए पहचान काफी हद तक छोटी-छोटी निजी जानकारियों पर निर्भर थी।
शनिवार को 1,000 से ज्यादा रिश्तेदार पोखरा पहुंचे ताकि निचले इलाकों के जिलों से लाए गए 102 शवों की तस्वीरें देख सकें। पुलिस ने बताया कि परिवारों ने टैटू, हार, झुमके और यहां तक कि स्कूल की यूनिफॉर्म से भी अपने प्रियजनों की पहचान की।
एक पिता ने ऑनलाइन तस्वीर देखकर अपने पांच साल के बेटे की पहचान की, जिसका शव नवलपरासी में काफी दूर निचले इलाके में मिला था। पुलिस इंस्पेक्टर दीपक रिजाल ने कहा, “जहां चेहरे पहचाने नहीं जा सकते, वहां रिश्तेदार शवों की पहचान उन चीजों से कर रहे हैं जो उनके पास थीं। और भी रिश्तेदार आ रहे हैं।”
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