हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार पीपल के पेड़ में देवी-देवताओं का वास माना गया है। इसलिए इस पेड़ की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, पीपल के पेड़ की जड़ में भगवान विष्णु, तने में महादेव शिव और शाखाओं में ब्रह्मा जी का वास होता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीपल की विधिपूर्वक पूजा करने से पितृ दोष, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव दूर होता है और व्यक्ति के जीवन में सदैव सुख-शांति बनी रहती है। क्या आप जानते हैं कि पीपल के पेड़ की पूजा किस दिन करनी चाहिए और किस नहीं करनी चाहिए। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि इस पेड़ की पूजा करना किस दिन शुभ माना जाता है।
पूजा के लिए सबसे शुभ दिन
शनिवार- हिंदू धर्म में पीपल की पूजा करने के लिए शनिवार का दिन अधिक शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनिवार के दिन विधिपूर्वक पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाने और पेड़ की परिक्रमा करने से साढ़ेसाती और पितृ दोष की समस्या दूर होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
गुरुवार- गुरुवार का दिन भी पीपल की पूजा करने के लिए लाभकारी माना जाता है। इस दिन पीपल की जड़ में जल अर्पित करने से व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है। इससे व्यक्ति के मान-सम्मान और आर्थिक समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
अमावस्या- अमावस्या के दिन भी पीपल की पूजा की जा सकती है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद एक लोटे में जल, थोड़ा कच्चा दूध, गंगाजल और काले तिल मिलाकर पेड़ की जड़ में अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से परिवार के सदस्यों पर पितरों की कृपा बरसती है और जीवन में आने वाले सभी दुख-दर्द दूर होते हैं।
किस दिन न करें पीपल की पूजा?
रविवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने और जड़ में जल अर्पित करने की सख्त मनाही है।
पीपल की पूजा में ध्यान रखें ये बातें
पीपल के पेड़ की जड़ में हमेशा सूर्योदय के बाद ही जल अर्पित करें।
पूजा के दौरान सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
रविवार के दिन पेड़ की पूजा न करें। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पेड़ पर दरिद्रता की देवी ‘अलक्ष्मी’ का वास होता है।
पेड़ की जड़ में जल चढ़ाते समय मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की तरफ होना चाहिए।
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