बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को लेकर मेटा प्लेटफॉर्म के खिलाफ अमेरिकी राज्यों के समूह द्वारा दायर मुकदमे की सुनवाई मंगलवार को कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में शुरू हो गई। इस मुकदमे के नतीजे से फेसबुक और इंस्टाग्राम में बड़े बदलाव का रास्ता खुल सकता है।
इसे युवा यूजर्स पर सोशल मीडिया के असर की अब तक की सबसे बड़ी कानूनी परीक्षा माना जा रहा है। मेटा ने आशंका जताई है कि उस पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक का जुर्माना लग सकता है, जो कंपनी के मौजूदा बाजार मूल्य के करीब है। वहीं एक अनुमान 200 अरब डॉलर का भी है, जो कंपनी की कर पश्चात तीन साल के मुनाफे के बराबर होगा।
कैलिफोर्निया की डिप्टी अटॉर्नी जनरल मेगन ओनील ने ओकलैंड की अदालत में आठ सदस्यीय जूरी के सामने कहा कि मेटा का बिजनेस मॉडल यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर खींचने, उन्हें ज्यादा से ज्यादा समय तक जोड़े रखने और उनका डाटा जुटाने पर आधारित था।
उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों के मामले में यह रणनीति खास तौर पर प्रभावी रही। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मुकदमा फेसबुक या इंस्टाग्राम को बंद करने के लिए नहीं है।
कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी के नेतृत्व में 29 राज्यों ने मेटा पर आरोप लगाया है कि उसने फेसबुक और इंस्टाग्राम को इस तरह डिजाइन किया कि बच्चे और किशोर इनकी लत के शिकार हो जाएं। राज्यों का कहना है कि इससे चिंता, अवसाद और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा। उनका यह भी आरोप है कि मेटा ने अपने प्लेटफॉर्मों की सुरक्षा को लेकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया।
मामले में 29 राज्यों के दावों पर सुनवाई होगी। राज्यों का आरोप है कि मेटा ने बच्चों से जुड़ा व्यक्तिगत डाटा गलत तरीके से एकत्र और इस्तेमाल कर संघीय कानून का उल्लंघन किया।
वहीं, मेटा का कहना है कि उसने बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। कंपनी ने राज्यों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने सुरक्षा को लेकर कोई भ्रामक जानकारी नहीं दी और राज्य यह साबित करने में नाकाम रहे हैं कि उनके निवासियों को नुकसान हुआ।
Live Halchal Latest News, Updated News, Hindi News Portal