महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को बांबे हाई कोर्ट को बताया कि इस वर्ष गणेश चतुर्थी महोत्सव के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी मूर्तियों के उपयोग पर रोक लगाना संभव नहीं होगा। लेकिन, ऐसी मूर्तियों को धीरे-धीरे चलन से बाहर कर दिया जाएगा।
पीओपी से बनी मूर्तियों के विसर्जन से प्राकृतिक जल स्रोतों में होने वाले प्रदूषण को लेकर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही अदालत ने पिछले सप्ताह सरकार से कहा था कि वह मिट्टी की मूर्तियां इस्तेमाल करने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर अपना रुख साफ करे।
एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने हाई कोर्ट को बताया कि वैसे तो सरकार मिट्टी से बनी गणेश मूर्तियों के इस्तेमाल के बारे में प्रधानमंत्री मोदी की अपील का पालन करेगी, लेकिन इस साल ऐसा करना मुश्किल होगा।
इस पर जस्टिस अजय गडकरी और कमल खता की पीठ ने पूछा कि क्या राज्य सरकार ने पीएम मोदी को अपनी स्थिति से अवगत कराया है, जिन्होंने पिछले सप्ताह ‘मन की बात’ कार्यक्रम में श्रद्धालुओं से पीओपी की मूर्तियों के बजाय मिट्टी की गणेश प्रतिमा इस्तेमाल करने की अपील की थी। मिलिंद साठे ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री की अपील का गंभीरता से पालन करेगी।
साथ ही उन्होंने हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि वह 2025 में दिए गए उस आदेश को जारी रखे, जिसके तहत छह फीट से ऊंची पीओपी से बनी मूर्तियों को समुद्र में विसर्जित करने की अनुमति दी गई थी।
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