उत्तराखंड की धामी सरकार के फैसले के मुताबिक आज 1 जुलाई से देवभूमि उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड का अस्तित्व पूरी तरीके से खत्म होने जा रहा है. उत्तराखंड में 1 जुलाई से मददसा शिक्षा के इतिहास का एक नया अध्याय शुरू होगा. राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का फैसला लागू कर दिया है. अब तक मदरसों की मान्यता, संचालन, शैक्षणिक व्यवस्था उत्तराखंड, मदरसा शिक्षा बोर्ड के माध्यम से होती थी. लेकिन अब उसकी जगह उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण काम करेगा. सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य मदरसों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना और शिक्षा व्यवस्था को एक समान बनाना है.
उत्तराखंड की मदरसा शिक्षा व्यवस्था में आज से एक बड़ा परिवर्तन प्रभावी होगा। नई व्यवस्था के अंतर्गत उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है । राज्य में अल्पसंख्यकों के सभी शैक्षणिक संस्थान नए ढांचे के अंतर्गत संचालित होंगे।उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड, उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2016 और उत्तराखंड गैर सरकरी अरबी और फ़ारसी मदरसा मान्यता नियम, 2019 पहली जुलाई से प्रभावी नहीं रहेंगे। राज्य सरकार ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान अधिनियम के अंतर्गत एक नई व्यवस्था लागू की है।
नए ढांचे के अंतर्गत उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के लिए मान्यता प्रदान करने, उनकी कार्य प्रणाली की निगरानी करने और शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिेश्चित करने का उत्तरदायी होगा। नई व्यवस्था में मुस्लिम, सिक्ख, जैन, ईसाई, बौद्ध और फ़ारसी समुदाय के शैक्षणिक संस्थान सम्मिलित किए जाएंगे। सभी संस्थानों को लिखित मानक का अनुपालन करने तथा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करने की आवश्यकता होगी।
राज्य सरकार के अनुसार नए ढांचे का उद्देश्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करना है।
इसके बाद सभी मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता लेनी होगी। उन्हें राज्य शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम भी लागू करना होगा। मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को एनसीईआरटी की बुक्स मिलेंगी। इस बदलाव के साथ ही मदरसों में पीएम पोषण योजना यानी मिड-डे मील को लेकर भी सख्त शर्त लागू हो जाएगी। अब वही मदरसे और अन्य अल्पसंख्यक स्कूल इस योजना का फायदा उठा सकेंगे, जो विद्यालयी शिक्षा विभाग से संबद्ध होंगे। बिना संबद्धता वाले संस्थानों को यह सुविधा नहीं मिलेगी। इस बदलाव का दायरा सिर्फ मुस्लिम समुदाय के मदरसों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी समुदायों के शिक्षण संस्थान भी अब इसी प्राधिकरण के अंतर्गत आ गए हैं।
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