पंजाब व चंडीगढ़ के लिए गर्व का पल रहा जब 88 वर्षीय रिटायर्ड IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू, जिन्हें लोग “ब्रूम वॉरियर” के नाम से जानते हैं, को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित दूसरे सिविल इन्वेस्टिचर समारोह में प्रदान किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।
इंदरजीत सिंह सिद्धू पंजाब कैडर के पूर्व DIG रह चुके हैं और 1996 में रिटायर हुए थे। 1938 में संगरूर जिले में जन्मे सिद्धू ने 1961 में पंजाब पुलिस जॉइन की थी और सेवा के दौरान उन्हें राष्ट्रपति पुलिस मेडल भी प्राप्त हुआ था।
रिटायरमेंट के बाद उन्होंने चंडीगढ़ की सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई को अपना मिशन बना लिया। रोज़ सुबह वह साइकिल ट्रॉली के साथ खुद कचरा उठाते हैं और लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करते हैं। शुरुआत में कुछ लोगों ने उनका मज़ाक भी उड़ाया, लेकिन धीरे-धीरे उनका यह प्रयास एक आंदोलन बन गया।
उनके कार्यों को सोशल मीडिया पर भी खूब सराहा गया और उद्योगपति आनंद महिंद्रा सहित कई लोगों ने उन्हें प्रेरणादायक बताया। उनके बेटे अमोलदीप सिंह सिद्धू के अनुसार, उनका यह स्वभाव हमेशा से ही रहा है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते। अब पद्मश्री मिलने के बाद उनका यह सफर सिर्फ व्यक्तिगत नहीं रहा, बल्कि एक संदेश बन गया है कि असली सेवा और बदलाव उम्र या पद से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से आता है।
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