मुख्यमंत्री नायब सैनी ने प्रदेश की सभी सहकारी चीनी मिलों को अगले एक वर्ष के भीतर घाटे से निकालकर लाभकी स्थिति में लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक चीनी मिल की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा कर कमियों को दूर किया जाए और जवाबदेही तय की जाए।
हरियाणा विजन-2047 के तहत सहकारिता विभाग की पांच वर्षीय कार्ययोजना की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारी चीनी मिलों से किसानों के हित सीधे जुड़े हैं इसलिए उनका आर्थिक रूप से मजबूत होना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निजी चीनी मिलें लाभ में चल रही हैं तो सहकारी मिलें घाटे में क्यों हैं।
चीनी मिलों को 632 करोड़ रुपये की सहायता दे चुकी है। उन्होंने सहकारी चीनी मिलों में निष्क्रिय अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। मिलों के आधुनिकीकरण, एथेनॉल और कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित करने की योजना को तेजी से लागू करने को कहा। लक्ष्य रखा गया है कि अगले वित्त वर्ष तक सभी सहकारी चीनी मिलों में सीबीजी प्लांट लगाए जाएं।
सीएम ने कुशल कर्मियों की कमी दूर करने के लिए आईटीआई में चीनी उद्योग से संबंधित विशेष कोर्स शुरू करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नई डेयरी सहकारी समितियां बनाने, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को डेयरी और चारा उत्पादन के लिए पंचायत भूमि लीज पर देने तथा पशुधन के लिए चारे की दीर्घकालिक योजना तैयार करने को कहा।
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