सभी नुकसान जानते हुए भी क्यों सिगरेट नहीं छोड़ पाते लोग

सिगरेट के हर पैकेट पर कैंसर से सड़े हुए गले या फेफड़ों की डरावनी तस्वीर होती है। हर कोई जानता है कि तंबाकू जानलेवा है, इससे दिल की बीमारियां, स्ट्रोक और फेफड़े खराब होते हैं। इसके बावजूद दुनिया भर में करोड़ों लोग रोजाना स्मोकिंग करते हैं।

आखिर ऐसा क्यों है कि मौत का खौफ भी इस लत के सामने छोटा पड़ जाता है? इसके जानलेवा प्रभावों के बारे में पता होने के बाद भी लोग सिगरेट या तंबाकू की आदत को छोड़ नहीं पाते, इसका क्या कारण है? दरअसल, इसके पीछे कमजोर इच्छाशक्ति नहीं, बल्कि कोई और वजह छिपी है। आइए डॉ. सफलता बाघमर (सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से इस बारे में जानते हैं।

निकोटीन की लत
तंबाकू में पाया जाने वाला निकोटीन दुनिया के सबसे खतरनाक और एडिक्टिव केमिकल्स में से एक है। जब कोई व्यक्ति स्मोकिंग करता है, तो निकोटीन धुएं के जरिए फेफड़ों से होता हुआ कुछ ही सेकंड्स में दिमाग तक पहुंच जाता है। दिमाग में पहुंचते ही यह डोपामाइन रिलीज करता है, जिसे फील-गुड या रिवॉर्ड हार्मोन भी कहते हैं।

इससे व्यक्ति को सुकून और खुशी का एहसास होता है। धीरे-धीरे दिमाग को इस नकली सुकून की आदत लग जाती है। जब निकोटीन का असर खत्म होता है, तो दिमाग फिर से उसकी मांग करता है। यही से सिगरेट या तंबाकू की लत शुरू होती है, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

विड्रॉल सिंड्रोम का डर
जब कोई व्यक्ति तंबाकू छोड़ने की कोशिश करता है, तो उसका शरीर और दिमाग इसके खिलाफ रिएक्ट करते हैं। इसे मेडिकल भाषा में निकोटीन विड्रॉल कहते हैं। स्मोकिंग बंद करने के कुछ ही घंटों के अंदर व्यक्ति को घबराहट, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, फोकस में कमी, उदासी और बेचैनी होने लगती है। कई लोग इस शारीरिक और मानसिक तकलीफ को बर्दाश्त नहीं कर पाते और इससे बचने के लिए दोबारा सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं।

तंबाकू का जाल
ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (GATS-2) के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि भारत में लगभग 26.7 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू की लत की चपेट में हैं। बड़े पैमाने पर लोग खैनी, गुटका और जर्दा जैसे धुआं रहित तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। क्योंकि वे सिगरेट नहीं पीतीं, इसलिए कई बार उन्हें लगता है कि वे सुरक्षित हैं, जो कि एक भ्रम है।

वहीं, शहरी और कामकाजी युवा महिलाओं में तनाव और पीयर प्रेशर के कारण सिगरेट पीने का चलन तेजी से बढ़ा है। इसके कारण कई तरह के कैंसर का खतरा काफी तेजी से लोगों में बढ़ा है।

कॉर्पोरेट मार्केटिंग की चालें
तंबाकू कंपनियां अब युवाओं और महिलाओं को लुभाने के लिए नए-नए पैंतरे अपना रही हैं। बाजार में फ्लेवर्ड सिगरेट, ई-सिगरेट, स्लिम सिगरेट और निकोटीन पाउच उतारे जा रहे हैं। इन्हें कूल लाइफस्टाइल के रूप में पेश किया जाता है, जिससे टीनएजर्स और युवा आसानी से इस जाल में फंस जाते हैं।

इस लत से छुटकारा कैसे पा सकते हैं?
निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी- निकोटीन च्युइंग गम या पैच की मदद से धीरे-धीरे लत को कम किया जाता है।
बिहेवियरल थेरेपी- काउंसिलिंग के जरिए उन ट्रिगर्स को पहचानना और बदलना सिखाया जाता है।
पारिवारिक सपोर्ट- अपनों का साथ और हौसला इस मुश्किल सफर को आसान बना देता है।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com