केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक चीनी के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी है। सरकार ने यह कदम कम उत्पादन की चिंताओं के बीच घरेलू कीमतों को काबू में रखने और स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से जारी किए गए एक नोटिफिकेशन में, सरकार ने ITC (HS) कोड 1701 14 90 और 1701 99 90 के तहत चीनी के लिए एक्सपोर्ट नीति को प्रतिबंधित से बदलकर निषिद्ध कर दिया है। इस आदेश में कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी के एक्सपोर्ट को शामिल किया गया है।
कुछ एक्सपोर्ट पर दी गई है छूट
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि, यह रोक 30 सितंबर तक लागू रहेगी या जब तक कि इसे आगे न बढ़ाया जाए। अगर इसे आगे नहीं बढ़ाया जाता है, तो एक्सपोर्ट नीति वापस प्रतिबंधित श्रेणी में आ जाएगी।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि एक्सपोर्ट पर लगी यह रोक CXL और TRQ कोटे के तहत यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका को भेजे जाने वाले शिपमेंट पर लागू नहीं होगी।
इसके साथ ही एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) के तहत किए जाने वाले एक्सपोर्ट और खाद्य सुरक्षा के उद्देश्यों के लिए सरकार से सरकार (G2G) स्तर पर भेजे जाने वाले शिपमेंट को भी जारी रखने की अनुमति होगी। नोटिफिकेशन में आगे कहा गया है कि जो खेप पहले से ही एक्सपोर्ट की प्रक्रिया में हैं, उन्हें कुछ विशेष शर्तों के तहत भेजने की अनुमति दी जाएगी।
घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए लिया गया फैसला
वहीं, अगर लोडिंग नोटिफिकेशन की तारीख से पहले शुरू हो गई थी, या अगर शिपिंग बिल पहले ही फाइल हो चुका था और ऑर्डर लागू होने से पहले जहाज किसी भारतीय बंदरगाह पर लग चुका था या लंगर डाला जा चुका था, तो शिपमेंट आगे बढ़ सकते हैं। उन मामलों में भी एक्सपोर्ट की इजाजत होगी; जहां नोटिफिकेशन जारी होने से पहले ही कंसाइनमेंट कस्टम अधिकारियों या कस्टोडियन को सौंप दिए गए थे।
बता दें कि, सरकार के इस फैसले का मकसद घरेलू कीमतों को काबू में रखना है, क्योंकि मुख्य गन्ना उत्पादक इलाकों में गन्ने की पैदावार कम होने के कारण लगातार दूसरे साल उत्पादन खपत से पीछे रहने की उम्मीद है। इस बात का भी डर है कि अल नीनो की स्थितियां आने वाले मॉनसून को बिगाड़ सकती हैं, जिससे अगले सीजन के उत्पादन को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं।
वहीं, ब्राजील के बाद भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी एक्सपोर्टरों में से एक है। इससे पहले भारत सरकार ने सभी चीनी मिलों को 1.59 मिलियन मीट्रिक टन चीनी एक्सपोर्ट करने की इजाजत दी थी। व्यापारियों ने पहले ही लगभग 800,000 टन के कॉन्ट्रैक्ट साइन कर लिए थे, जिसमें से 600,000 टन से ज्यादा चीनी एक्सपोर्ट की जा चुकी है।
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