मध्य पूर्व में जारी संकट के बीच भारतीय नागरिकों को वहां से सुरक्षित बाहर निकालने का एक नया रास्ता तैयार किया जा रहा है। इसको लेकर भारत और UAE एक ऐसे समझौते पर काम कर रहे हैं, जिससे फुजैरा बंदरगाह के रास्ते लाखों भारतीय कामगारों को निकालने में मदद मिलेगी। यह समझौता दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत द्विपक्षीय संबंधों में एक और अहम कड़ी साबित होगा।
जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी 15 मई को यूरोप के लिए रवाना होंगे। इस यात्रा के दौरान वे फुजैरा में रुकेंगे और फिर नीदरलैंड्स जाएंगे। यात्रा के पहले चरण में वह फुजैरा पोर्ट पर यूएई के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच यह दोनों देशों के लिए ऐसा पहला समझौता होगा।
होर्मुज के पश्चिम में स्थित है फुजैरा पोर्ट
इसकी वजह यह है कि फुजैरा ‘होर्मुज जलडमरूमध्य'(Strait of Hormuz) के पश्चिम में स्थित है, जो इस युद्ध के दौरान एक मुख्य ‘चोक- प्वाइंट’ (अवरोधक बिंदु) के रूप में उभरा है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, यदि हवाई यातायात में किसी तरह की बाधा आती है, तो UAE में काम करने वाले लाखों भारतीयों को जहाजों के जरिए सुरक्षित निकाला जा सकता है।
पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय कामगार रहते हैं, जिनमें से लगभग 43 लाख कामगार अकेले UAE में मौजूद हैं। मौजूदा संघर्ष के दौरान, फुजैरा जिसे प्रस्तावित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे का संभावित शुरुआती बिंदु माना जा रहा था। अब UAE तक सामान पहुंचाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी काम कर रहा है। इसकी वजह यह है कि दुबई बंदरगाह तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया है।
एशियाई प्रीमियम शुल्क को लेकर मिलेगा भारत को लाभ
इसके साथ ही सामान की ढुलाई के लिए ‘खोर फक्कन’ नामक एक अन्य बंदरगाह का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां से सामान को सड़क मार्ग के जरिए आगे भेजा जाता है। ईरान ने ठीक इसी वजह से फुजैरा को अपना निशाना बनाया है। पीएम की यह यात्रा UAE के प्रति भारत के समर्थन का संकेत है, क्योंकि UAE पर लगातार ईरान की ओर से हमले हो रहे हैं।
इसके अलावा यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब UAE ने ओपेक नामक शक्तिशाली तेल-कार्टेल से खुद को अलग कर लिया है। माना जा रहा है कि सऊदी अरब के साथ कुछ मतभेदों के चलते UAE ने यह कदम उठाया है।
पिछले कुछ सालों में भारत और UAE के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति से भारत को काफी फायदा पहुंच सकता है। यह फायदा विशेष रूप से इसलिए भी अहम है, क्योंकि सऊदी अरब जैसे देश अपने द्वारा बेचे जाने वाले कच्चे तेल पर एशियाई देशों से एशियाई प्रीमियम (अतिरिक्त शुल्क) भी वसूलते हैं।
Live Halchal Latest News, Updated News, Hindi News Portal