भारत समेत दुनियाभर के आम आदमी और शेयर बाजार के लिए 6 मई का दिन बड़ा राहत देने वाला है। दरअसल, पश्चिम एशिया (West Asia Conflict) में जारी तनाव कम होता नजर आ रहा है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है, और शेयर बाजार में एकाएक तेजी आई है। खास बात है कि क्रूड में गिरावट (Crude Down) से शेयर मार्केट के साथ-साथ सोने व चांदी में भी तेजी देखी जा रही है, साथ ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का रिस्क भी कुछ हद तक कम हो गया है।
दरअसल, अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते पर सहमति बनने के करीब हैं, जिससे ग्लोबल मार्केट को राहत मिली है। कच्चे तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत की गिरावट ने भी इस मजबूत खरीदारी को समर्थन दिया। इसके अलावा, ओपेक देशों और UAE ने भी तेल का प्रोडक्शन बढ़ाने की बात कही है।
कच्चे तेल में गिरावट, कितनी बड़ी राहत?
कच्चे तेल में गिरावट से पूरी दुनिया में महंगाई का रिस्क कम हो जाएगा। खासकर, भारत जैसे में देश में तो इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा। क्योंकि, हम अपनी जरुरत का 80 फीसदी तेल आयात करते हैं और क्रूड की बढ़ती कीमतों से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ता है। वहीं, ऑयल की कीमतें बढ़ने से एयरलाइन समेत कई सेक्टर्स पर लागत दबाव बढ़ता है और इससे वस्तुओं की कीमतें बढ़ाने का प्रेशर बढ़ जाता है।
ईरान-अमेरिका के बीच खत्म होती टेंशन और ओपेक देशों व UAE के ऑयल प्रोडक्शन बढ़ाने के एलान से कच्चे तेल में लगातार गिरावट आ रही है। फिलहाल, ब्रेंट क्रूड 7 फीसदी की गिरावट के साथ 102.51 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।
प्राइस 1 डॉलर प्रति बैरल घटने से कितना फायदा?
जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 1 डॉलर प्रति बैरल घटती है, तो भारत के सालाना आयात बिल में लगभग 1.5 बिलियन से 2 बिलियन डॉलर (करीब ₹12,000 करोड़ से ₹16,000 करोड़) की कमी आती है। अगर बढ़ती है तो इतना ही भार बढ़ जाता है। इंपोर्ट बिल के कम होने से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होता है और डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूती मिलती है। यह स्थिति देश की अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
चूंकि, कच्चे तेल में लगातार तेजी आने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बढ़ने का रिस्क बढ़ता जा रहा था, लेकिन अब क्रूड में भारी गिरावट से यह जोखिम कम हो सकता है। वहीं, ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य गतिरोध खत्म होता है तो तेल के साथ-साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गैस की सप्लाई भी पूरी तरह से बहाल हो जाएगी। ऐसे में पेट्रोल-डीजल से लेकर LPG के मोर्चे पर आम आदमी को बड़ी राहत मिलेगी।
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