उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर के आसपास चल रहे निर्माण कार्य के बीच एक बार फिर आस्था और इतिहास का संगम देखने को मिला है। उज्जैन की पावन धरती ने खुदाई के दौरान एक जलाधारी सहित प्राचीन शिवलिंग को उजागर किया, जिससे पूरे क्षेत्र में श्रद्धा का माहौल गहरा गया है। दरअसल, महाकाल लोक परियोजना के तहत बीते कुछ वर्षों से लगातार निर्माण और विस्तार कार्य जारी है।
इसी कड़ी में बड़ा गणेश मंदिर क्षेत्र में टनल निर्माण के लिए की जा रही खुदाई के दौरान शुक्रवार सुबह एक बुलडोजर चालक की नजर अचानक इस शिवलिंग पर पड़ी। संवेदनशीलता दिखाते हुए उसने तुरंत कार्य रोककर मंदिर प्रशासन को सूचना दी—और यहीं से एक साधारण निर्माण स्थल आस्था के केंद्र में बदल गया।
संयोग देखिए कि उसी समय महाकाल मंदिर में भस्म आरती का दिव्य आयोजन चल रहा था। जैसे ही शिवलिंग मिलने की खबर फैली, पुजारी, अधिकारी और स्थानीय श्रद्धालु मौके पर पहुंचने लगे। देखते ही देखते वहां जलाभिषेक, पुष्प अर्पण और पूजा-पाठ का क्रम शुरू हो गया। माहौल ऐसा बना मानो वर्षों से दबा यह शिव स्वरूप स्वयं अपने प्रकट होने की घड़ी चुनकर सामने आया हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उज्जैन, जिसे प्राचीन काल में अवंतिका नगरी के नाम से जाना जाता था, अनादि काल से शिवमय रही है। इतिहास के उतार-चढ़ाव, प्राकृतिक आपदाओं और समय की धूल ने भले ही कई मंदिरों और शिवलिंगों को जमीन में समा दिया हो, लेकिन आज भी यह भूमि समय-समय पर अपने आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर करती रहती है।
यह पहली बार नहीं है जब महाकाल क्षेत्र में खुदाई के दौरान धार्मिक अवशेष सामने आए हों। 2019 से शुरू हुए महाकाल लोक निर्माण कार्य के दौरान भी कई स्थानों से शिवलिंग और देवी-देवताओं की मूर्तियां मिल चुकी हैं। ऐसे में यह ताजा घटना न केवल धार्मिक आस्था को और मजबूत करती है, बल्कि उज्जैन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गहराई की भी पुष्टि करती है।
फिलहाल, मौके पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है और प्रशासन स्थिति को व्यवस्थित बनाए रखने में जुटा है। एक ओर जहां विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उज्जैन की धरती बार-बार यह संदेश दे रही है कि यह केवल एक शहर नहीं, बल्कि जीवंत आध्यात्मिक विरासत का केंद्र है—जहां हर कण में शिव का वास है।
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