55 किमी एलिवेटेड रिंग रोड का पहला चरण आईएसबीटी से आश्रम, छह चरणों में बनेगा मेगा कॉरिडोर

योजना के अनुसार 55 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को छह हिस्सों में विभाजित किया गया है। परियोजना की रूपरेखा प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है और अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर काम तेजी से चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि डीपीआर पूरा होने के बाद वित्तीय स्वीकृतियां और अन्य मंजूरियां ली जाएंगी, जिसके बाद करीब छह महीने में जमीनी निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है।

राजधानी में ट्रैफिक जाम से राहत और तेज आवाजाही के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने महात्मा गांधी रिंग रोड पर करीब 55 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाने की योजना को आगे बढ़ा दिया है। अधिकारियों के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को छह चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें पहला चरण कश्मीरी गेट अंतरराज्यीय बस अड्डे (आईएसबीटी) से आश्रम या डीएनडी फ्लाईवे तक लगभग 11.5 किलोमीटर के हिस्से पर केंद्रित होगा।

अधिकारियों ने बताया कि इस हिस्से को प्राथमिकता इसलिए दी गई है क्योंकि यहां जमीन की उपलब्धता अपेक्षाकृत आसान है और यूटिलिटी शिफ्टिंग, पेड़ों या अन्य अवरोधों की समस्या कम है। वैकल्पिक रूप से आजादपुर से आईएसबीटी के बीच 9.5 किलोमीटर का सेक्शन भी पहले चरण में लिया जा सकता है, क्योंकि वहां भी निर्माण से जुड़ी बाधाएं कम बताई जा रही हैं। परियोजना की रूपरेखा प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है और अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर काम तेजी से चल रहा है। सलाहकार एजेंसी को ट्रैफिक स्टडी, इंजीनियरिंग डिजाइन, लागत अनुमान और इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रेटेजी तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।

अधिकारियों का कहना है कि डीपीआर पूरा होने के बाद वित्तीय स्वीकृतियां और अन्य मंजूरियां ली जाएंगी, जिसके बाद करीब छह महीने में जमीनी निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है। यह पूरी परियोजना मौजूदा रिंग रोड के ऊपर एक नई एलिवेटेड लेयर विकसित करने की परिकल्पना पर आधारित है। इसमें अलग-अलग हिस्सों में एलिवेटेड कॉरिडोर, ग्रेड सेपरेटर, अंडरपास और सिग्नल सिस्टम का उन्नयन शामिल होगा। साथ ही पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए भी बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएंगी। अधिकारियों के अनुसार, डीपीआर तैयार करने के लिए रीकॉनिसेंस सर्वे, टोपोग्राफिकल मैपिंग और जंक्शन असेसमेंट का काम लगभग पूरा हो चुका है। अगले चरण में पर्यावरणीय मंजूरी, भूमि से जुड़ी जांच और ट्रैफिक मॉडलिंग पर काम किया जाएगा। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना इसलिए बनाई गई है ताकि वित्तीय बोझ को नियंत्रित रखा जा सके और निर्माण के दौरान शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित न हो।

छह हिस्सों में विभाजित कर योजना पर किया जा रहा काम
योजना के अनुसार 55 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को छह हिस्सों में विभाजित किया गया है। इसमें आजादपुर से आईएसबीटी (9.5 किमी), आईएसबीटी से आश्रम/डीएनडी (11.5 किमी), डीएनडी से मोती बाग (10.5 किमी), मोती बाग से राजौरी गार्डन (10 किमी), राजौरी गार्डन से पीतमपुरा के पैसिफिक मॉल तक (13.5 किमी) और आउटर रिंग रोड पर चांदगीराम अखाड़ा से मजनू का टीला तक 2.5 किलोमीटर का स्पर शामिल है। पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य राजधानी में ट्रैफिक दबाव कम करना और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि सलाहकार एजेंसी को इस तरह का डिजाइन तैयार करने को कहा गया है जिससे मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

यह फायदा होगा
आईएसबीटी से आश्रम/डीएनडी तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर राजधानी के सबसे व्यस्त ट्रैफिक मार्ग पर दबाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके बन जाने से थ्रू ट्रैफिक ऊपर शिफ्ट होगा, जिससे नीचे की सड़कों पर जाम घटेगा और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। नोएडा, साउथ दिल्ली और नॉर्थ दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। रोजाना आने-जाने वाले लाखों कम्यूटर्स, लॉजिस्टिक्स वाहनों और सार्वजनिक परिवहन को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

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