पाकिस्तान के जिन्ना का मंत्री बनने का ऑफर ठुकरा

भारतीय कॉरपोरेट जगत में कई ऐसी कहानियां हैं जो प्रेरणा से भरी हैं, लेकिन विप्रो (Wipro) के फाउंडर अजीम प्रेमजी की कहानी बिल्कुल अलग है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, वर्तमान में अजीम प्रेमजी की नेटवर्थ 22.5 बिलियन डॉलर (करीब 2.09 लाख करोड़ रुपये) है। अजीम प्रेमजी दुनिया के 119वें नंबर के सबसे अमीर हैं। अमीरी के मामले में वह बिड़ला ग्रुप वाले कुमार मंगलम बिड़ला को टक्कर देते हैं। ब्लूमबर्ग बिलिनियर इंडेक्स के मुताबिक कुमार मंगलम बिड़ला की नेटवर्थ 22.4 बिलियन डॉलर (2.05 लाख करोड़ रुपये) है। वह अजीम प्रेमजी से एक रैंक नीचे 120वें नंबर पर हैं।

अजीम प्रेमजी ने न सिर्फ एक पारंपरिक पारिवारिक व्यवसाय को ग्लोबल आईटी दिग्गज में तब्दील किया, बल्कि दानवीरता की एक ऐसी मिसाल कायम की है जो दुनिया भर के अमीरों के लिए एक नजीर बन चुकी है।

पिता ने ठुकरा दिया था जिन्ना का प्रस्ताव
विप्रो के इतिहास के पन्ने पलटें तो इसकी शुरुआत सॉफ्टवेयर से नहीं, बल्कि वनस्पति तेल और साबुन से हुई थी। अजीम प्रेमजी के पिता, मोहम्मद हाशम प्रेमजी ने साल 1945 में महाराष्ट्र के जलगांव जिले के अमलनेर में ‘वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड’ की स्थापना की थी। यह कंपनी मुख्य रूप से ‘सनफ्लावर वनस्पति’ और ‘787’ कपड़े धोने का साबुन बनाती थी, जो यूनिलीवर के ‘डालडा’ को कड़ी टक्कर देती थी।

भारत के विभाजन के समय, मोहम्मद अली जिन्ना ने मोहम्मद हाशम प्रेमजी को पाकिस्तान आकर वहां कैबिनेट मंत्री बनने का एक बड़ा ऑफर दिया था। लेकिन उन्होंने उस प्रस्ताव को साफ ठुकरा दिया और भारत में ही रहने का फैसला किया। आज भी अमलनेर शहर में विप्रो के कई शेयरधारक बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

जिम्मेदारी का बोझ और स्टैनफोर्ड से वापसी
साल 1966 में जब अजीम प्रेमजी प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे, तभी उनके पिता का 51 वर्ष की आयु में अचानक निधन हो गया। उनकी मां उस समय हाजी अली में अपना एक चैरिटी ऑर्थोपेडिक अस्पताल चलाने में पूरी तरह से व्यस्त थीं। ऐसे में महज 21 साल की उम्र में अजीम प्रेमजी को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर पारिवारिक व्यवसाय संभालने के लिए वापस भारत आना पड़ा।

कुकिंग ऑयल से लेकर आईटी का बादशाह बनने का सफर
अजीम प्रेमजी की दूरदर्शिता ने कंपनी की किस्मत बदल दी। साल 1977 में जब आईबीएम (IBM) ने भारत से एग्जिट किया, तो प्रेमजी ने इसे एक बड़े अवसर के रूप में देखा। उन्होंने अपनी तेल और साबुन बनाने वाली कंपनी को पहले एक हार्डवेयर निर्माता और फिर एक विशाल सॉफ्टवेयर (IT) कंपनी में बदल दिया। इसी का नाम बाद में ‘विप्रो’ (Wipro) पड़ा।

विप्रो का मार्केट कैप 2 लाख करोड़ के पार
आज विप्रो का मार्केट कैप 2,14,071 करोड़ रुपये से अधिक। ये $10.4 बिलियन रेवेन्यू के साथ भारत के सबसे बड़े सॉफ्टवेयर सेवा प्रदाताओं में से एक है। सिलिकॉन वैली में कंपनी का अपना एक इनोवेशन सेंटर है, जो नई तकनीकों को विकसित करने और स्टार्टअप्स के साथ सहयोग करने पर काम करता है। साल 2019 में अजीम प्रेमजी ने कार्यकारी अध्यक्ष का पद छोड़ दिया और दिन-प्रतिदिन के संचालन की कमान अपने बेटे रिशद प्रेमजी को सौंप दी। अजीम प्रेमजी अब गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।

महादानवीर: दुनिया को सिखाया कैसे करते हैं दान
अजीम प्रेमजी की पहचान सिर्फ उनके द्वारा खड़ी की गई संपत्ति से नहीं, बल्कि उनके द्वारा दान की गई संपत्ति से होती है। वे बिल गेट्स और वॉरेन बफे द्वारा शुरू की गई ‘द गिविंग प्लेज’ (The Giving Pledge) पर हस्ताक्षर करने वाले पहले भारतीय अरबपति हैं, जिसके तहत उन्होंने अपनी संपत्ति का अधिकांश हिस्सा परोपकारी कार्यों में देने की प्रतिबद्धता जताई है। उनके पास परिवार के ट्रस्टों और प्रत्यक्ष होल्डिंग्स के माध्यम से विप्रो में लगभग 72.9% हिस्सेदारी है, लेकिन उन्होंने अपनी संपत्ति के आधे से अधिक हिस्से को दान करने का संकल्प लिया है।

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