आधुनिक युद्ध में ड्रोन स्वार्म एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं। सस्ते हमलावर ड्रोन महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों से ज्यादा महंगे पड़ रहे हैं। ऐसे में उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने एक वीडियो शेयर कर हाई-पावर माइक्रोवेव (HPM) तकनीक पर चर्चा की है, जो एक ही पल्स से सैकड़ों ड्रोन को मार गिरा सकती है।
’49 ड्रोन, एक पल्स, सब खत्म’
आनंद महिंद्रा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “49 ड्रोन, एक पल्स, सब चले गए” इस वीडियो में देखा जा सकता है कि HPM सिस्टम एक निश्चित क्षेत्र में कई लक्ष्यों को एक साथ प्रभावित कर सकता है।
पारंपरिक हथियारों की तरह एक-एक करके निशाना साधने की जरूरत नहीं पड़ती। यह तकनीक इलेक्ट्रॉनिक्स को सॉफ्ट किल करके काम करती है, यानी ड्रोन के नेविगेशन, कम्युनिकेशन और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम को बर्बाद कर देती है।
युद्ध में लागत का असंतुलन
महिंद्रा ने हाल के संघर्षों की ओर इशारा करते हुए कहा कि सस्ते कामिकाजे ड्रोन इंटरसेप्टर की कीमत का एक छोटा सा हिस्सा होते हैं। हमलावर को जीतने की जरूरत नहीं, बस लागत का गणित अपने पक्ष में रखना काफी है। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में ईरान समर्थित ड्रोन हमलों ने साबित किया है कि सस्ते ड्रोन बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।
लेजर अकेले पर्याप्त क्यों नहीं?
लेजर-आधारित सिस्टम सस्ते और सटीक माने जाते हैं, लेकिन महिंद्रा ने बताई कि लेजर एक समय में सिर्फ एक लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं। स्वार्म के खिलाफ यह समस्या है। दूसरी ओर, HPM पूरे क्षेत्र को कवर करता है। दोनों तकनीकें पारंपरिक मिसाइलों और तोपों के साथ पूरक भूमिका निभाएंगी। भविष्य की हवाई सुरक्षा लेयर्ड डिफेंस पर आधारित होगी।
महिंद्रा ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा कि आयात पर निर्भर रहना रणनीति नहीं है। भारत के लिए यह बहुत प्रासंगिक है। प्रतिक्रियात्मक रूप से समाधान आयात करना कोई रणनीति नहीं। स्वदेशी, एआई-सक्षम HPM और लेजर क्षमता जल्द बनानी होगी।
उन्होंने जोर दिया कि भारत में प्रतिभा है, बस तेज खरीद प्रक्रिया, धैर्यवान पूंजी और डीप-टेक स्टार्टअप्स को स्केल करने वाली संस्थाओं की जरूरत है। महिंद्रा ने हाल ही में गुजरात स्थित डीप-टेक इनक्यूबेटर iCreate के चेयरमैन का पद संभाला है और स्टार्टअप्स को इसमें योगदान देने के लिए आमंत्रित किया है।
भारत में HPM विकास की प्रगति
भारत का DRDO पहले से ही हाई-पावर माइक्रोवेव डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) विकसित कर रहा है। यह ट्रक-माउंटेड सिस्टम ड्रोन स्वार्म को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। प्रोटोटाइप ने 1 किलोमीटर तक ड्रोन को निष्क्रिय किया है और 2026 तक 5 किलोमीटर रेंज का लक्ष्य रखा गया है।
ड्रोन अब युद्ध के नियम बदल रहे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष में हजारों सस्ते ड्रोन टैंकों, पुलों और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बना रहे हैं। मध्य पूर्व में भी ड्रोन स्वार्म उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं।
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